कैथल। जिले में अब तक 50 प्रतिशत धान की फसल की कटाई हो चुकी है। साथ ही पराली जलाने का सिलसिला भी जारी है। यही कारण है कि वातावरण की हवा हर साल की तरह फिर से खराब होने लगी है। शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स वीरवार को 148 पर पहुंच गया है। हवा में घुले धुएं के कारण सुबह-शाम न सिर्फ धुंधलापन नजर आने लगा है बल्कि आंखों में जलन की समस्या भी आम हो गई है। रात के समय में यह परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है।
बता दें कि बीते सप्ताह लगातार दो दिन हुई बूंदाबांदी से शहर की हवा शुद्ध और साफ हो गई थी। चार दिन पहले 18 अक्तूबर को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 70 दर्ज किया गया था, जो अच्छी श्रेणी में आता है, मगर उसके बाद हर रोज हवा प्रदूषित होती जा रही है। विशेषज्ञों की मानें तो वाहनों से निकलने वाला धुआं और खेतों में जलने वाले फसल अवशेष पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सांस के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
90 किसानों पर लगाया गया 2.25 लाख रुपये का जुर्माना
कृषि विभाग के अनुसार जिले में लगभग दो लाख हेक्टेयर रकबे में धान बोया हुआ है। इसमें से करीब 30 फीसदी में हाथ से कटाई होती है, जिससे पराली जलाने की आवश्यकता नहीं रहती। बाकी धान कंबाइन मशीन से काटा जाता है। उसमें से करीब 60 फीसदी किसान पराली प्रबंधन करते हैं। बाकी आग लगा देते हैं।
पिछले साल लगभग 350 किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे, जिन्होंने पराली में आग लगाई थी। वहीं इस बार हरसेक द्वारा मिली रिपोर्ट व प्रशासनिक जांच के बाद 90 आग लगाने वाले किसानों से 2 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि इस साल पिछले वर्ष की आग की घटनाओं से 30 प्रतिशत कम मामले हैं। हरसेक की 287 सूचनाओं में से 99 जगहों पर आगजनी की घटनाएं नहीं मिली। हरसेक धुएं को सेंसर कर आग की लोकेशन ढूंढता है।
कई बार हवा की वजह से धुआं दूसरी जगह फैल जाता है, जिस वजह से कई बार सूचना सटीक नहीं होती। यदि कोई किसान अपने खेतों में पराली में आग लगाता है तो 2 एकड़ तक एरिया में 2500 रुपये पर्यावरण क्षति-पूर्ति चार्ज वसूला जाता है। 2-5 एकड़ तक 5 हजार रुपये और इससे अधिक पर 15 हजार प्रति घटना की दर से जुर्माना लगाया जाता है।
कृषि उपनिदेशक निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि हिसार स्थित हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर हरसेक की ओर से सेटेलाइट से अवशेष जलाने वालों पर नजर रखी जा रही है। धान अवशेषों को किसान आग के हवाले न करके उसे मिट्टी में मिलाएं। इसके लिए किसानों को नई मशीनें भी उपलब्ध करवाई जा रही है। जिससे वे गांठे बनाकर कमाई कर सकते हैं।
बीते एक सप्ताह में ऐसे बढ़ा शहर का एक्यूआई-
दिनांक एक्यूआई
15 अक्तूबर 167
16 अक्तूबर 151
17 अक्तूबर 156
18 अक्तूबर 70
19 अक्तूबर 157
20 अक्तूबर 161
21 अक्तूबर 148