संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मिट्टी, पानी, धूप और हवा सब रोगों की एक दवा है। यह बात जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. शकुंतला दहिया ने कही। उन्होंने यह बात आयुष विभाग एवं हरियाणा योग आयोग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे अंबाला रोड स्थित महर्षि दयानंद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय में कही।
उन्होंने बताया कि इस शिविर का 20 नवंबर को समपान होना है। इस मौके पर प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक चिकित्सा का विशेष महत्व है, प्राकृतिक चिकित्सा जीवन जीने की पद्धति है। मिट्टी, पानी, धूप, हवा सब रोगों की एक दवा। वर्तमान में हम प्रकृति से जैसे-जैसे दूर हो रहे हैं वैसे-वैसे रोग हमको पकड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जीवाणु शरीर में जीवनी शक्ति के कमजोर होने पर विजातीय पदार्थों के जमाव होने पर ही आक्रमण कर पाते हैं, जब शरीर में उनके रहने और पनपने लायक अनुकूल वातावरण तैयार हो जाता है। अत: मूल कारण विजातीय पदार्थ है, जीवाणु नहीं। जीवाणु द्वितीय कारण है। प्रकृति स्वयं सबसे बड़ा चिकित्सक है। शरीर में स्वयं को रोगों से बचाने व अस्वस्थ हो जाने पर पुन: स्वास्थ्य प्राप्त करने की क्षमता विधमान है। मनुष्य के शरीर में स्वयं को रोग मुक्त करने को अपूर्व शक्ति है। डॉ. दहिया ने स्वस्थ रहने के लिए योग प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन का अंग बनाने का अनुरोध किया।
इस मौके पर जानकारी दी गई कि प्राकृतिक चिकित्सा का उद्देश्य व्यक्ति को अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की देखभाल करने, किसी भी बीमारी के लक्षणों को कम करने, शरीर की उपचार क्षमता को सहयोग देने तथा शरीर को संतुलित करने के लिए शिक्षित करना है। कार्यक्रम में आयुष स्टाफ से आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट एवं आयुष योग सहायक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।