कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के हॉल में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से बुधवार को आयोजित एक दिवसीय सीपीआर प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। डीसी जगदीश शर्मा ने सीपीआर वैन को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मानव जीवन बचाना व मानवता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयास के माध्यम से सीपीआर जैसी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी घर-घर तक पहुंचे, इसके लिए रेडक्रॉस विभाग की टीम पूरा प्लान तैयार करके जिला में शिविरों का आयोजन करें, ताकि आमजन इसका पूरा लाभ उठा सके। गौरतलब है कि यह सीपीआर वैन डॉ भीम राव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय क्योडक़, चीका, डीएवी कालेज चीका, गांव बरटा , गांव मघो माजरी, पुलिस लाईन कैथल, चौधरी ईश्वर सिंह कन्या महाविद्यालय पूंडरी, ग्राम पंचायत पाई, बात्ता, कलायत मेन चौक, शहीद स्मारक कमेटी चौक पहुंचेगी।
इस सीपीआर मोबाइल वैन के माध्यम से लोगों को प्राथमिक उपचार के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि आपदा के समय कृत्रिम सांस के जरिए व्यक्ति की न केवल जिंदगी बचाई जा सके, बल्कि नया जीवन दान दिया जा सके। जानकारी दी गई कि सीपीआर एक ऐसी तकनीक है, जिसमें हृदय गति बंद होने या सांस न आने पर आम व्यक्ति को नहीं पता होता कि अब क्या करना है। इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से बहुत से लोग इस तकनीक को सीखकर लोगों अमूल्य जीवन बचा पाएंगें। मोबाइल वैन के साथ दो प्रशिक्षक रहेगें, जो जिला कैथल में सीपीआर का प्रशिक्षण देंगे।
इस मौके पर सीटीएम कपिल कुमार ने कहा कि रेडक्रॉस द्वारा दिए जा रहे सीपीआर प्रशिक्षण का आमजन को लाभ उठाना चाहिए तथा सीपीआर को सीखकर किसी की अमूल्य जिंदगी को बचा सके। इसके साथ-साथ सीपीआर को सीखा हुआ व्यक्ति भी आगे 10-10 व्यक्ति को सीपीआर को सीखाएं, ताकि यह एक जन आंदोलन का रूप ले लें और हर व्यक्ति सीपीआर को सीख सके। इस मौके पर आरकेएसडी के प्राचार्य डॉ. संजय गोयल ने भी अपना संबोधन दिया। रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा सीपीआर पर आधारित लघु फिल्म को भी दिखाया गया, जोकि आमजन तक प्रचार-प्रसार में सहायक सिद्ध होगी।
डीसी ने रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा प्रदान किए गए। 300 स्कूलों के लिए प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स एवं 10 स्कूलों में आरओ का वितरण किया। इस अवसर पर प्रो. हरेन्द्र गुप्ता, डॉ. सुरेन्द्र आर्य, राजेश, रघुबीर, नरेश कुमार, सुरेश कैंदल, सुशील कुमार, बीरबल दलाल, पवन कुमार व रामपाल मौजूद रहे।
कैसे देते हैं सीपीआर
सीपीआर क्रिया करने में सबसे पहले पीड़ित को किसी ठोस जगह पर लिटा दिया जाता है और प्राथमिक उपचार देने वाला व्यक्ति उसके पास घुटनों के बल बैठ जाता है। उसकी नाक और गला चेक कर ये सुनिश्चित किया जाता है कि उसे सांस लेने में कोई रुकावट तो नहीं है। जीभ अगर पलट गयी है तो उसे सही जगह पर उंगलियों के सहारे लाया जाता है। सीपीआर में मुख्य रूप से दो काम किए जाते हैं। पहला छाती को दबाना और दूसरा मुँह से सांस देना जिसे माउथ टु माउथ रेस्पिरेशन कहते हैं। पहली प्रक्रिया में पीड़ित के सीने के बीचोबीच हथेली रखकर पंपिंग करते हुए दबाया जाता है। एक से दो बार ऐसा करने से धड़कनें फिर से शुरू हो जाएंगी। पंपिंग करते समय दूसरे हाथ को पहले हाथ के ऊपर रख कर उंगलियो से बांध लें अपने हाथ और कोहनी को सीधा रखें। अगर पम्पिंग करने से भी सांस नहीं आती और धड़कने शुरू नहीं होतीं तो पंपिंग के साथ मरीज को कृत्रिम सांस देने की कोशिश की जाती है।