यात्री अमजद ने बताया कि वह सहारनपुर का निवासी है और शहर में अपनी एक रिश्तेदारी में मंगलवार को ही आया था, उसे रोडवेज के चक्का जाम की जानकारी नहीं थी। उसे बुधवार को सहारनपुर जाना था, लेकिन बसों का संचालन नहीं होने के काफी परेशानी झेलनी पड़ी। निजी वाहन चालकों ने बस से तिगुना किराया वसूला था।
यात्री रिंकू ने बताया कि वह करनाल का निवासी है। भाई-दूज के पर्व के तहत कैथल में अपनी बहन के घर मंगलवार को ही आया था। अब बुधवार को अपने घर करनाल में वापस जाना था, लेकिन बस का संचालन न होने के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ा। हड़ताल के कारण यात्रियों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए सरकार को बीच का रास्ता निकालना चाहिए था।
बुजुर्ग किताबों देवी ने बताया कि उसने तितरम जाना था, किसी भी सरकार का बस का संचालन न होने के चलते काफी देर तक निजी बस का इंतजार करना पड़ा। इसके बाद निजी बस के माध्यम से गांव जाना पड़ा।
बुजुर्ग संतों देवी ने बताया कि वह कैथल में किसी रिश्तेदार से मिलने के लिए आई थी। बुधवार को उसने अपने घर जींद में वापस जाना था, लेकिन रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के कारण करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद एक निजी वाहन के माध्यम से जींद के लिए रवाना होना पड़ा।
रोडवेज की बसों का चक्का जाम होने के चलते शहर के दोनों रेलवे स्टेशन पर भीड़ का खूब आलम रहा। इस कारण यात्रियों को टिकट नहीं मिली। इन यात्रियों को मजबूरन ही बेटिकट यात्रा करनी पड़ी। रेलवे स्टेशन पर टिकट वितरण को काउंटर पर उचित व्यवस्था न होने के कारण ऐसा हुआ। इसके साथ ही सामान्य दिनों की अपेक्षा बुधवार को रेलवे की दोगुनी टिकटें बिकी। पहले एक दिन में करीब 25 हजार रुपये की टिकटों की बिक्री दोनों ही स्टेशनों पर होती थी, लेकिन इस दौरान करीब 50 हजार रुपये की टिकटें बिकी। सुबह व शाम के समय आने वाली रेलगाड़ियों में भीड़ रही।
अधिकारी के अनुसार
रोडवेज के महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि कैथल डिपो से रात्रि ठहराव की करीब 50 बसों का संचालन हुआ है। जबकि कर्मचारियों के विरोध के चलते बुधवार को कैथल डिपो से कोई बस नहीं चली। एक बस दिल्ली भी ढांड से गई है।