New ambulance vehicles are standing for two months.
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कर्मचारियों के अभाव में स्वास्थ्य विभाग को मिली 9 नई एंबुलेंस गाड़ियां कंडम हो रही हैं। खड़ी-खड़ी गाडिय़ों की मुरम्मत व अन्य खर्च बढ़ेगा। लेकिन इनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। इन गाड़ियों में विशेषकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में लाने और ले जाने की व्यवस्था की जानी है, लेकिन इनके नहीं चलने के कारण महिलाएं सुविधा से वंचित हैं।
विभाग के पास जो अन्य गाड़ियां उपलब्ध हैं, उन्हीं से गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों को सेवा देने का कार्य जैसे-तैसे चलाया जा रहा है। पहले से उपलब्ध गाड़ियों की संख्या भी मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं है। कई बार तो मरीजों के परिजनों को निजी गाड़ियां किराये पर लेकर मोटा खर्च वहन करना पड़ रहा है।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय जिले में नागरिक अस्पताल सहित अन्य सीएससी व पीएससी में 16 एंबुलेंस मरीजों की सेवा के लिए लगाई गई हैं। नागरिक अस्पताल में केवल 7 एंबुलेंस इस समय कार्य में लाई जा रही हैं। मरीजों की जरूरत को देखते हुए यहां कम से कम 15 गाडिय़ों की आवश्यकता है। नई 9 एंबुलेंस के संचालन से मरीजों की जरूरतें पूरी हो सकती हैं, लेकिन ये अस्पताल में बिना प्रयोग के खड़ी हैं।
एंबुलेंस गाड़ियों को चलाने के लिए चालक भर्ती की सूचना भी सार्वजनिक हो गई थी। बाद में विवाद बढ़ता देख सीएमओ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह कहा था कि अभी कोई एंबुलेंस चालक भर्ती नहीं किया जा रहा है।
इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि नई एंबुलेंस गाडिय़ों के संचालन और कर्मचारी लगाने बारे उच्चाधिकारियों से बातचीत की गई है। विभाग जल्द से जल्द कर्मचारी लगाने का प्रयास कर रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही गाड़ियों के लिए चालक मिल जाएंगे। उसके साथ ही मरीजों के लिए एंबुलेंस सेवा जिले में पर्याप्त हो जाएगी।