48-कैथल। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय।
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कैथल। ऑडिट रिपोर्ट में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये विभाग के खातों से निकालकर प्रयोग करने और बाद में निकाले गई राशि को संबंधित खातों में जमा करने की गड़बड़ी सामने आई है। एक नहीं बल्कि चार शिक्षा अधिकारियों के कार्यकाल में ऐसा हुआ है। करीब 15 साल बाद ऑडिट रिपोर्ट में यह गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में शिक्षा निदेशालय ने चार पूर्व जिला शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करवाकर इस राशि का उस अवधि का ब्याज वसूलने के आदेश जारी किए हैं, जिस अवधि में यह राशि बैंक से निकाली और बाद में जमा की गई है। निदेशालय ने विभागीय अधिकारियों को 23 फरवरी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाकर विभाग को रिपोर्ट करने को कहा गया है। फिलहाल इस मामले में डीईओ ने शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर मामले में अतिरिक्त जानकारी मुहैया करवाने का अनुरोध किया है।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगस्त 2007 से लेकर जुलाई 2013 के बीच यह राशि निकलवाई गई। उस दौरान तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी हरचरण सिंह के कार्यकाल में 1430887 रुपये, कमला मिड्ढा के कार्यकाल में 872160 रुपये, साधू राम बेरवाल के कार्यकाल में 1173549 और जसबीर सिंह के कार्यकाल में 498825 रुपये की राशि निकलवाई गई। यह राशि करीब 39.75 लाख रुपये से ज्यादा बनती है। राशि निकालने के बाद इसका कोई भी वाउचर जांच के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नहीं पाया गया। इस राशि को पॉकेटिड एमाउंट दिखाया गया है।
शिक्षा अधिकारी को जारी पत्र में विभाग ने कहा है कि तत्कालीन अधिकारियों की ओर से निकाली गई यह राशि जमा तो करवा दी, लेकिन निकालने और जमा करवाने के बीच जो ब्याज बनता है, उसकी रिकवरी नहीं दी। ऐसे में विभाग ने ब्याज रिकवरी के लिए केस दर्ज करवाने के निर्देश जारी किए हैं।
23 फरवरी तक रिपोर्ट दर्ज करने के थे निर्देश
शिक्षा निदेशालय की ओर से जिला शिक्षाअधिकारी को इस संबंध में केस दर्ज करवाकर 23 फरवरी तक रिपोर्ट करने के निर्देश दिए थे। अभी तक तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं करवाया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि विभाग के मुख्यालय से तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ ब्याज रिकवरी को लेकर केस दर्ज करवाने के निर्देश आए हैं। ये अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिसके चलते अब इनका कोई स्थायी पता उपलब्ध नहीं है। निदेशालय को इनका पता उपलब्ध करवाने बारे पत्र लिखा गया है। विभाग की ओर से जो पता आएगा, उसी के आधार पर उपरोक्त पूर्व अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा।