फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: केशव तो किसी के लड्डू गोपाल, बच्चों की तरह करतीं देखभाल

Mon, 26 Aug 2024 03:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। जन्माष्टमी का पर्व सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पर्व का लड्डू गोपाल की सेवा करने वाली महिलाओं को भी बेसब्री से इंतजार रहता है। ये महिलाएं हर वर्ष अपने पास रखे हुए लड्डू गोपाल का जन्मदिन केक काटकर मनाती हैं। यही नहीं,किसी ने उनका नाम केशव रखा है तो कोई लड्डू गोपाल के नाम से उन्हें पुकारता है। लड्डू गोपाल की सेवा करने वाली महिलाओं का कहना है कि उनकी सेवा से उन्हें काफी सुकून मिलता है। वे अपने बच्चों की तरह ही उनकी देखभाल करती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान रूपी लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना से उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
विज्ञापन


पिछले 10 वर्षों से घर के मंदिर में रखे गए लड्डू गोपाल की सेवा कर रही हूं। उनका नाम भी केशव रखा है। घर में चाहे कुछ भी खाना बने, पहला भोग लड्डू गोपाल को ही लगाया जाता है। जब भी कभी बाहर जाना होता है तो पड़ोस में बने मंदिर में स्थापित कर देती हूं। हम लड्डू गोपाल भगवान रूप में एक नन्हें बालक में पूजते हैं। क्योंकि ये बच्चे के रूप में हैं।
सुशीला शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 11, कैथल।

लड्डू गोपाल जी मेरे घर के मंदिर में पिछले पांच साल से विराजमान हैं। उनका नाम कान्हा जी है। मैं व मेरा परिवार इनकी प्रतिदिन पूजा करते हैं। इनका एक एक बच्चे की तरह पालन पोषण करते हैं। जब भी कहीं बाहर जाते हैं तो उन्हें अपने साथ लेकर जाते हैं। तीनों पहर दूध व अन्य आहार देते हैं। इनकी हम पर बड़ी कृपा है।
विज्ञापन


गुरमीत, गृहिणी।

पिछले पांच साल से मंदिर में विराजमान लड्डू गोपाल जी की सेवा कर रही हूं। लड्डू गोपाल जी का नाम केशव रखा है। रात के समय में उन्हें शयन कक्ष में सुला देती है और सुबह ताली बजाकर उन्हें जगा देते हैं। फिर गंगाजल से स्थान करवा कर उनको नए वस्त्र पहनाती हैं। इसके बाद मंदिर में स्थापित कर पूजा अर्चना करते हैं और उन्हें भोग लगाते हैं।
पायल, गृहिणी।
लड्डू गोपाल जी मेरे घर के मंदिर में पिछले दो साल से विराजमान हैं। हमने उनका नाम लड्डू गोपाल रखा हुआ है। वह उनका खाने पीने का दिनरात ख्याल रखती है। दो पहर उनकी पूजा करती है। जब भी कहीं जाती है या साथ ले जाती है या घर में बेटी की डयूटी लगाती है। इनकी हम पर बहुत कृपा हैं।

मुकेश, गृहिणी।
लड्डू गोपाल जी मेरे घर के मंदिर में पिछले दो वर्षो से विराजमान हैं। हमने उनका नाम कान्हा रखा हुआ है। घर के सभी सदस्य लड्डू गोपाल जी का पूरा ख्याल रखते हैं। कोई सदस्य उन्हें नहलाता है तो कोई भोग लगाता हैं। वहीं, कोई सदस्य सुलाता है। सुबह व शाम के समय हम उनकी पूजा अर्चना करते हें। हम उनका जन्मोत्सव भी मनाते हैं।
विज्ञापन

सीमा, गृहिणी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें