संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। करीब पांच साल के अंतराल बाद दो फरवरी को होने वाले शहर की सबसे पुरानी संस्था जाट हाई स्कूल सोसाइटी के चुनाव प्रक्रिया में बुधवार को नामांकन करने का अंतिम दिन रहा। 103 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए। इस प्रकार दोनों दिनों में कुल 149 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे हैं। इन नामांकन पत्रों की जांच 23 जनवरी को की जाएगी जबकि 24 जनवरी को सुबह 10 से शाम चार बजे तक नामांकन वापस लिए जाएंगे। इसके बाद 25 जनवरी को उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न अलॉट किए जाएंगे।
गौरतलब है कि जाट शिक्षण संस्था सबसे पुरानी संस्था है। इस संस्था की जाट हाई स्कूल सोसाइटी की चुनाव प्रक्रिया में 75 कॉलेजियम पर चुनाव होने हैं। इस चुनाव प्रक्रिया कुल 16 हजार 94 मतदाता मतदान करेंगे। उसी दिन शाम को परिणाम घोषित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राजनीति के बड़े दिग्गज इस संस्था के सदस्य हैं, जिनमें पूर्व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा, कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला, जजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला और इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व संसदीय सचिव रामपाल माजरा भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि संस्था के ही कुछ मतदाताओं ने उनके वोट बिना किसी सूचना दिए काटने का आरोप लगाया था। इस दौरान मतदाता सूची में स्कूटनी कर करीब 3400 मत काटे थे । इसके बाद लोगों ने कड़ी आपत्ति भी जताई थी। प्रशासन की ओर से इनको लेकर आपति व एतराज दर्ज किए गए थे। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब 16 हजार 94 वोटों पर चुनाव होगा।
जाट हाई स्कूल सोसाइटी का वर्ष 2022 की जनवरी में चुनाव कार्यक्रम तय हुआ था। मतदाताओं की सूची पर 75 काॅलेजियम के चुनाव होने थे। उस समय प्रबंधक समिति ने काॅलेजियम में जुड़े लगभग 10 हजार नए मतदाताओं को अलग-अलग काॅलेजियम में जोड़ दिया था। इस पर कई सदस्यों ने आपत्ति जताई थी। इस संस्था में करीब साढ़े तीन हजार विद्यार्थी स्कूल, काॅलेज, आईटीआई में पढ़ाई कर रहे हैं।
पहली बार वर्ष 2007 में हुआ मतदान ः संस्था के पूर्व प्रधान बलवान कोटड़ा ने बताया कि साल 1939 में सोसाइटी बनाई गई थी। जाट हाई स्कूल सोसाइटी 86 साल पुरानी है। इस संस्था के संस्थापक दीन बंधू सर छोटू राम हैं, उन्होंने एक स्कूल से इस संस्था की नींंव रखी थी। शुरुआत में इस संस्था में सर्व सहमति से प्रधान का चुनाव किया जाता था। उस समय 100 रुपये की आजीवन सदस्य की फीस थी और करीब 200 से 300 सदस्य ही होते है।
उन्होंने बताया कि इस संस्था में सबसे अधिक लंबे समय तक 15 साल तक बारू राम संस्था के प्रधान बने रहे थे। इस संस्था के रजिस्टर्ड होने के बाद वर्ष 2007 में प्रधान के लिए पहली बार मतदान हुआ था। इससे पहले 2006 में करीब 10 हजार वोट बने थे। 2007 में बलवान कोटड़ा प्रधान बने थे। कोटड़ा का कार्यकाल 2010 तक रहा। 2010 में हुए चुनाव में बलवान कोटड़ा दूसरी बार प्रधान बने।
इसके बाद वर्ष 2013 से 2016 तक एडहाॅक कमेटी का कार्यकाल रहा। इसके बाद हुए चुनावों में रणबीर ढुल फौजी प्रधान चुने गए। वह 2019 तक प्रधान रहे। इसके बाद इंद्र नौच प्रधान बने। तब से एडहॉक कमेटी कार्यभार संभाले है। अब पांच साल के अंतराल के बाद चुनाव हो रहा है।