पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा के बाद सत्ताधारी दल से विधायक लीला राम ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि उनके हल्के के 14 गांवों में से सफाई के नाम पर ढाई करोड़ रुपये हड़प लिए गए, जबकि न तो कई सरपंचों को पता, न ही डीसी स्तर के अधिकारियों को और न ही उन्हें। जबकि विकास कार्यों से संबंधित कार्य विधायक होने के नाते उनकी जानकारी में होने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को शिकायत दी है। जिस पर सीएम ने विजिलेंस को मामले की जांच के लिए कहा है।
विधायक ने कहा कि अमर उजाला में छपी खबरों के बाद उन्हें पता चला था कि कलायत हल्के के कई गांवों में करोड़ों रुपये सफाई के नाम पर हड़प गए हैं। तो उन्होंने भी कैथल के अधिकारियों से मिलकर जानना चाहा कि यहां तो यह खेल नहीं चल रहा। जिससे पता चला कि कैथल हल्के के भी 14 गांवों में सफाई के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है। गुहणा, मानस, सिरटा, पाड़ला, जसवंती, डेरा गदला, खुराना, बलवंती जैसे 14 गांवों के साथ-साथ शांति नगर नाम पर दो टेंडर लगाए गए हैं। जबकि शांति नगर नाम का न तो कोई गांव है और न ही कोई कालोनी है। इसके बारे में रिपोर्ट ली तो पता चला कि चौंकाने वाली बात यह बात सामने आई है कि ढाई करोड़ के लगभग भुगतान हो चुका है। सफाई के नाम पर, तालाबों व नालों के नाम पर भुगतान हो चुका है। जबकि उनके खुद व अधिकारियेां यहां तक की डीसी तक को भी इस बारे में जानकारी नहीं कि उन्हें भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बात की है कि यह स्कैंडल है, इसमें बाद में राजनेताओं के नाम घसीटे जाएंगे। सीएम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विजिलेंस से जांच जांच के आदेश दिए हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि ईमानदार मुख्यमंत्री के आदेश पर निष्पक्ष जांच होगी। यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से सीएम से मिलेंगे।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में ठेकेदार द्वारा आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों से पैसे लेकर भर्ती की जा रही है। सीएमओ व डीसी से भी मिले हैं। युवाओं से 50 से 70 हजार रुपये मौजूदा ठेकेदार द्वारा मांग की जा रही है। यह मामला भी उन्होंने सीएम मनोहर लाल के संज्ञान में ला दिया है।