कैथल। सात साल से अधूरा चल रहा सिटी स्क्वेयर का निर्माण फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है। स्थानीय निकाय विभाग मुख्यालय में सोमवार को निदेशक स्तर पर इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने के लिए विचार-विमर्श हुआ। फैसला लिया गया कि नगर परिषद ने इस प्रोजेक्ट के लिए जो रिवाइज एस्टीमेट तैयार किया था, उसकी खामियों को दूर किया जाए। इसके बाद जल्द से जल्द नए सिरे से रिपोर्ट तैयार कर विभाग मुख्यालय को भेजी जाए ताकि प्रोजेक्ट पर काम फिर शुरू हो सके। प्रोजेक्ट की लागत 38 करोड़ से बढ़कर 53 करोड़ हो गई थी।
कांग्रेस सरकार में हुआ था शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
वर्ष 2015 में कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मंत्री रणदीप सुरजेवाला थे। उनके समय में इस प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ था। इस पर लागत 38 लाख रुपये आनी थी। प्रोजेक्ट के तहत पुराने बस अड्डे की जमीन पर बैंकिंग व सिटी स्कवेयर प्रोजेक्ट का निर्माण किया जाना था। बैंकिंग स्क्वेयर में कई मंजिला भवन का निर्माण होना था, जिसमें शहर के अलग-अलग जगहों पर स्थित बैंकों को शिफ्ट करने की तैयारी की गई थी। दरअसल इन बैंकों के बाहर खड़े होने वाले वाहनों की वजह से वहां पर जाम की समस्या है। इसे देखते हुए यह निर्णय किया गया था ताकि शहरवासियों को जाम से मुक्ति मिल सके।
इसके अलावा शेष हिस्से में मनोरम उद्यान विकसित किया जाना था, जहां लोग भ्रमण कर सकें। तीन साल पूर्व इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। सीएम फ्लाइंग टीम की जांच के बाद तत्कालीन नगर परिषद चेयरपर्सन, तत्कालीन ईओ सहित अन्य अधिकारियों व निर्माण एजेंसी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज हुआ था। तभी से इस मामले की जांच चल रही है। प्रोजेक्ट पर करीब 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का काम पूरा होने की जानकारी दी जा रही है। कई बार इस प्रोजेक्ट का काम पूरा करने की मांग उठ चुकी है।
स्थानीय निकाय विभाग ने ली सुध
नगर परिषद कार्यालय से मिली जानकारी के विभागीय अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट की सुध ली है। प्रदेश सरकार के बजट में भी इस प्रोजेक्ट के लिए फंड की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए सोमवार को नगर परिषद कार्यालय से टीम को चंडीगढ़ स्थित विभाग मुख्यालय तलब किया गया था।
एमई राजकुमार शर्मा ने बताया कि वे सिटी स्क्वेयर प्रोजेक्ट को लेकर विभागीय कर्मचारियों के साथ सोमवार को चंडीगढ़ गए थे। वहां विभाग के निदेशक दुश्मंता कुमार वेहरा ने पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी ली। उन्होंने प्रोजेक्ट की खामियां दूर कर रिवाइज एस्टीमेट भेजने को कहा है। पूर्व में 53 करोड़ रुपये का रिवाइज एस्टीमेट भेजा गया था। इसमें अब समय अनुसार जो भी जरूरत होगी, उसे जोड़कर, अन्य कागजी खामियां दूर करते हुए रिपोर्ट बनाकर विभाग मुख्यालय भेज दी जाएगी। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट जल्द फिर से शुरू होगा और नियत समय पर पूरा भी होगा।