29-कैथल। दीवाली पर मिट्टी के दीये बनाते हुए कुम्हार।
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कैथल। दिवाली त्योहार पर इस बार स्थानीय स्तर पर बनाए गए कारीगरों के मिट्टी दीये घरों को रोशन करेंगे। बाजारों में मांग इतनी बढ़ गई है कि कारीगर बाजार में मिट्टी के दीयों की आपूर्ति मांग के अनुसार मुश्किल से कर पा रहे हैं। कारीगरों का कहना है कि पिछले दो सालों से कारोबार ठप हो गया था। अब फिर से पटरी पर लौटने लगा है।
मिट्टी के दीये तैयार करने में मेहनत और लागत अधिक होने से बाजार में उनकी बिक्री पूरी तरह ठप हो गई थी, लेकिन इस बार लोगों की दीये बनवाने के लिए अच्छी मांग आ रही है। दिवाली पर धन लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिट्टी के दीये बनाने का काम शुरू कर दिया है। उन्हें इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है। मिट्टी के दिये बनाने के लिए परिवार के सभी सदस्य हाथ बंटा रहे हैं। कोई मिट्टी गूंथने में लगा है तो किसी के हाथ चाक पर मिट्टी के बर्तनों को आकार दे रहे हैं। दर्जनों के हिसाब से लोग दुकानदारों से मिट्टी के दीयों की मांग कर रहे हैं।
ब्रिक्री बढ़ने की उम्मीद
रवि, राहुल, विनोद ने बताया कि इस बार उम्मीद है कि कुछ ज्यादा दीये की बिक्री होगी। पिछले साल करीब तीस हजार दीपक व मिट्टी के अन्य सामग्री बेची थी। इस बार उम्मीद है कि पचास हजार से साठ हजार तक दीये की बिक्री होगी। रेट भी पांच से आठ रुपये दिये का है। पिछले वर्ष से 20 फीसदी तक दीये की मांग बढ़ी है। इस बार मशीनी चाक पर दीये तैयार हो रहे हैं, जबकि पहले हाथ के चाक से दीये बनाए जाते रहे हैं।
काड़ी देवी, माया, परमजीत, उमेश व शिवम का कहना है कि दिवाली पर्व पर वह 5000 दीये बनाकर बेच देते हैं। इस बार दीये बेचने की संख्या दोगुनी हो गई है। बाजारों से मांग भी बड़े पैमाने पर आ रही है। इसे देखते हुए दिन व रात वह दीये बनाने में लगे हैं। उम्मीद है कि इस बार 15000 दीये वह बेच देंगे।