कलायत। संयुक्त किसान मोर्चा के शीर्ष नेताओं में राजनीति में प्रवेश को लेकर राहें अलग-अलग नजर आ रहीं हैं। हरियाणा में किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढ़ुूनी संयुक्त संघर्ष पार्टी बनाकर सक्रिय राजनीति में आ गए हैं। पंजाब के भी अन्य कई किसान नेता चुनाव में पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। कलायत में आयोजित किसान पंचायत में राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दो टूक जवाब दिया कि एसकेएम न तो राजनीति में जाएगा और न ही राजनीति में गए किसान नेताओं को कोई समर्थन देगा। उन्होंने कहा कि अब तक राजनीति से दूरी ही किसान आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति रही है। हालांकि बीजेपी के खिलाफ किसान नेता हर चुनाव में हमलावर रहे हैं लेकिन अब तक दूसरी पार्टियों के लिए खुलकर विरोध या समर्थन करने की उनकी रणनीति नहीं रही है। खास तौर पर तब जब वह एनडीए गठबंधन का हिस्सा न हों। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गुरनाम चढ़ूनी को किसी तरह का राजनीतिक समर्थन देने से इनकार किया। टिकैत ने कहा कि राजनीति में सक्रिय होकर चुनावी फायदा उठाने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य नहीं हैं। चुनावों के बाद यदि वे एसकेएम में वापसी करेंगे तो निर्णय उसी समय लिया जाएगा।
उधर, चढूनी सार्वजनिक मंच से बोल चुके हैं कि उनके राजनीति में जाने से प्रदेश में सबसे बड़ी दिक्कत या तो चौटाला परिवार को आएगी या फिर राकेश टिकैत को। टिकैत और संयुक्त संघर्ष पार्टी के नेता गुरुनाम सिंह चढूनी के बीच बनी खाई आने वाले समय में किसान आंदोलन को किस मार्ग पर लेकर जाएगी यह देखना दिलचस्प होगा।