Estimates of 15 MW power generation from the consumption of 2 lakh tonnes of straw per annum: Dr.Sonika
- फोटो : Kaithal
कृषि महाविद्यालय कौल की नवगठित कमेटी एन्सियंट बायोडाइवर्सिटी कल्चर (एबीसी) के सदस्य डा. मनेंदर सिंह एवं डा. सोनिका ने कांगथली में स्थित पराली से बिजली उत्पादन करने वाली यूनिट का दौरा किया। यह दौरा कृषि महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. प्रताप सिंह पंवार के नेतृत्व में किया गया।
सुखबीर एग्रो एनर्जी लिमिटेड (सेल) के अंतर्गत स्थापित इस इकाई के प्रमुख आरपी सिन्हा और मानव संसाधन प्रबंधक हरविंदर बांबल ने बताया कि किसानों के समक्ष वर्तमान में पराली के उचित प्रबंधन की एक विकट समस्या है। किसान के 1 एकड़ भूमि से लगभग 20-25 क्विंटल पराली निकलती है और अकेले कैथल जिले में सालाना 9 लाख टन पराली होती है। किसानों कि इस समस्या को ध्यान में रखते हुए और पराली के उचित प्रबंधन के लिए पराली से बिजली उत्पादन की इस यूनिट/ प्लांट की स्थापना 2019 मे की गई। इसके तहत किसानों से एक निश्चित मूल्य में पराली कि गांठे खरीदी जाती हैं जो कि लगभग 20-25 किलो की एक गांठ होती है। यह मूल्य 2020 में 135 रुपये प्रति क्विंटल था।
जबकि 2021 मे 160 रुपये प्रति क्विंटल होगा। कृषि महाविद्यालय कौल की सहायक प्रोफेसर डा. सोनिका ने बताया कि गांठे बनाने के लिए बेलर की मुख्य रूप से आवश्यकता होती है, जिसमें किसान को सरकार कि तरफ से सब्सिडी मिलने का भी प्रावधान है। यदि किसान समूह में (सोसाइटी) बेलर खरीदते हैं तो उन्हें 80 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है और यदि निजी तौर पर खरीदते है तो कई कंपनियां 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती हैं। इस प्लांट से सालाना 2 लाख टन पराली की खपत के साथ 15 मेगावाट बिजली उत्पादन का अनुमान है, जो कि उत्तर हरियाणा पावर ग्रिड को संबन्धित करार के तहत दी जाएगी। इस बिजली उत्पादन इकाई में प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के अनुसार बैक फिल्टर्स लगाए गए है जो कि डेनमार्क तकनीक पर आधारित हैं और 60 मीटर की ऊंचाई पर चिमनी लगाई गई है, जिससे किसी प्रकार कि जहरीली गैस नहीं निकलेगी और पर्यावरण को किसी भी प्रकार से प्रदूषित नही करेगी। इस तरह से बिजली उत्पादन में लगभग 200 मजदूरों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। लगभग 200 करोड़ कि लागत से तैयार हुए इस पराली से बिजली उत्पादन के प्लांट/इकाई के अक्तूबर 2021 में शुरू होने का अनुमान है। इससे पराली के उचित प्रबंधन, पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ-साथ किसानों को भी फायदा होगा, उन्हें पराली का मूल्य प्राप्त होगा और यदि किसान सीधे तौर पर इस प्लांट को पराली न देकर, बेलर (ठेके पर) को भी पराली तथा खेत को साफ करने कि जिम्मेदारी देता है तो उसके खेत की सफाई से लेकर अगली फसल की बुवाई के लिए खेत की जुताई तथा तैयार करने का खर्च भी आधा हो जाएगा और इसके बदले बेलर से भी लगभग 500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसान को मूल्य प्राप्त होगा।
साथ ही इस प्रक्रिया में 200-300 मजदूरों को रोजगार प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास कि प्रशंसा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मन की बात कार्यक्रम मे स्टार्ट अप इंडिया के अंतर्गत भी की गई है। इस परियोजना की जानकारी को ग्रामीण पर्यटन में सह उद्यमियता के अंतर्गत प्रदर्शन पैनल के रूप में कृषि महाविद्यालय कौल के विद्यार्थियों और किसानों को जानकारी प्रदान करने के लिए महाविद्यालय के प्रदर्शनी कक्ष में रखा जाएगा।