प्रौद्योगिकी संस्थान में अब विद्यार्थी खुद आत्मनिर्भर बन सकेंगे। संस्थान नये प्लेटफार्म शुरू करने जा रहा है। जिसमें विद्यार्थी रोजगारपरक बन पाएंगे। हर साल संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी ही अपनी मर्जी से नये कोर्सों की सूची बना कर हेड ऑफिस भेज देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। संस्थानों के लिए डीएसटी होना अनिवार्य किया गया है। तभी नये कोर्स शुरू कर सकेंगे। डीएसटी यानी ड्यूल सिस्टम ट्रेनिंग। इसमें विद्यार्थी एक साल के अंदर छह महीने थ्योरी व छह महीने प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ले सकते है।
जिले में नौ सरकारी और दस प्राईवेट आईटीआई
जानकारी के अनुसार जिले में नौ सरकारी व दस प्राईवेट आईटीआई हैं। जिनमें से दो वूमन आईटीआई पूंडरी व कैथल में हैं। बाकी सभी कोड आईटीआई हैं।
इंडस्ट्री के साथ होता है टाइअप
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ट्रेनिंग के लिए संस्थान और इंडस्ट्री के साथ टाइअप होना आवश्यक है, तभी विद्यार्थियों की ट्रेनिंग किसी अच्छी इंडस्ट्री में करवाई जा सकती है। टर्नर ट्रेड का स्वाटिक इंडस्ट्री के साथ टाइअप बताया जा रहा है।
पिछले साल से डीएसटी शुरू
जींद रोड स्थित आईटीआई के प्रिसिंपल सतीश मच्छाल ने बताया कि संस्थान में पिछले साल से ही डीएसटी प्रणाली शुरू की गई है। जिसमें टर्नर ट्रेड के लगभग 30-35 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। विद्यार्थियों की ओर से भी अच्छा रिसपांस मिल रहा है। आगे भी प्रयास रहेगा कि लगभग सभी ट्रेडों में ये सिस्टम शुरू हो।