09-कैथल। सीएमओ शैलेन्द्र ममगाईं शैली।
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दिल्ली में बर्ड फ्लू के केस मिलने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। इस संबंध में सिविल सर्जन द्वारा अस्पताल के कर्मियों और जिलावासियों को बचाव के लिए दिशा निर्देश जारी किये गये हैं। सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि बर्ड फ्लू फैलने का कारण मुर्गियों और अन्य पक्षियों को बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध लक्षणों की स्थिति में जांच और उपचार करवाएं, जिसकी सुविधा जिला नागरिक अस्पताल में उपलब्ध है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में इनफ्लुएंजा वायरस के स्ट्रेन से एक 11 साल के बच्चे की मौत बर्ड फ्लू से हुई है। कोरोना संकट के बीच अब बर्ड फ्लू ने अब जिले में भी स्वास्थ्य विभाग और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि लोगों से आवश्यक एहतियात बरतने की अपील की जा रही है। बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस (एच-5, एन-1) की वजह से होता है, जो संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले अन्य पक्षियों, जानवरों और इंसानों में फैलता है।
हालांकि बर्ड फ्लू कई तरह का होता है, लेकिन एच-5 व एन-1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है, जो मुर्गियों से इंसानों में आसानी से फैल जाता है। यह बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाले पानी के संपर्क में आने से होती है। संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले जानवर और इंसान आसानी से बर्ड फ्लू वायरस से संक्रमित हो जाते हैं। उसके लक्षण भी जुकाम जैसे ही होते हैं।
सिविल सर्जन डॉ. ममगाईं ने बताया कि हालांकि इसका इलाज अलग-अलग तरीकों से किया जाता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में एंटी वायरस दवाएं दी जाती हैं और लक्षण दिखने के 48 घंटों के भीतर इसकी दवाई लेनी आवश्यक होती है।