संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में डेंटल इम्प्लांट ओटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सब कुछ सही रहा तो महीने भर के बाद लोगों को इस सरकारी अस्पताल में डेंटल इंप्लांट की सुविधा मिलने लगेगी।
गौरतलब है कि इसके निर्माण के संदर्भ में करीब तीन महीने पहले निदेशक कुलदीप गौरी भी दौरा कर चुके हैं। डेंटल इंप्लांट ओटी बनने के बाद दांतों के सरकारी अस्पताल में ही ऑपरेशन हो सकेंगे। इसके लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।
इस समय मरीजों को दांतों की सर्जरी करवाने पटियाला या चंडीगढ़ जाना है पड़ता है। ऐसे में समय और रुपये अधिक खर्च करने पड़ते हैं। यह डेंटल इम्प्लांट अस्पताल में स्थापित डेंटल ओपीडी में ही बनाया जाएगा।
इससे पहले ये इम्प्लांट पंचकूला, बहादुरगढ़ व अंबाला में संचालित किए जा रहे हैं। कैथल के साथ-साथ करनाल और जींद में ये इम्प्लांट बनाए जाएंगे। इसमें दांतों की सर्जरी के अलावा निकले हुए दांतों की जगह पैच लगाकर कैप लगाई जाएगी, जो देखने में दांत की तरह नजर आएंगे। इस इम्प्लांट में दांत फिक्स होने का कार्य पूरी तरह से निशुल्क रहेगा, लेकिन सर्जरी के दौरान आने वाले सामान की राशि मरीजों को देनी होगी।
निजी अस्पतालों में इम्प्लांट केंद्र में किसी भी प्रकार की सर्जरी करवाने पर 25 से 30 हजार रुपये खर्च होते हैं, इस सेंटर के खुलने के बाद सरकारी अस्पतालों में आठ से 10 हजार रुपये में यह कार्य हो सकेगा। इससे मरीजों को एक तो आर्थिक रूप से फायदा होगा, दूसरा जिले से बाहर दूसरे अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा।
डाॅ. मनप्रीत कौर का तबादला, अब दूसरे चिकित्सक संभालेंगे ओपीडी : इस इम्प्लांट के लिए गुहला के उपमंडल अस्पताल के डाॅ. मनप्रीत कौर की नियुक्ति विभाग में हुई थी, लेकिन एक महीने पहले ही इनका तबादला दूसरे जिले में हो गया है। ऐसे में इस समय कार्यरत अन्य दंत चिकित्सकों को इसका प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके बाद आगामी एक महीने तक इसे शुरू करवा दिया जाएगा।
डेंटल इंप्लांट : एक आधुनिक दंत चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें कृत्रिम दांत को जबड़े में स्थापित किया जाता है। यह उन लोगों के लिए एक स्थायी समाधान है जो किसी कारणवश अपने दांत खो चुके होते हैं। इम्प्लांट एक प्रकार का स्क्रू होता है जो टाइटेनियम या अन्य बायोकॉम्पैटिबल मेटल से बना होता है। इसे जबड़े की हड्डी में लगाया जाता है, जहां यह धीरे-धीरे हड्डी के साथ एक हो जाता है। पहले डेंटिस्ट मुंह की जांच और एक्स-रे या सीटी स्कैन करते हैं और इसके बाद दांतों की संरचना और हड्डी की मजबूती को परखा जाता है।
इम्प्लांट के लिए डाॅ. मनप्रीत कौर की नियुक्ति विभाग में हुई थी, लेकिन उनका तबादला हो गया है। ऐसे में अन्य दंत चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। अगले माह में इसे शुरू किया जाएगा। इम्प्लांट स्थापित होने के बाद यहां पर दांतों के सभी प्रकार के ऑपरेशन सरकारी अस्पताल में ही हो पाएंगे। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन, कैथल