कैथल। सफाई व्यवस्था में बदहाल कैथल शहर की पिछले साल के मुकाबले स्वच्छता रैंकिंग 105 अंक नीचे गिर गई। इतनी बड़ी गिरावट का कारण शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था है। करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की सफाई को लेकर स्थिति में सुधार नजर नहीं आ रहा। सिटीजन फीडबैक में करीब 50000 से अधिक लोगों ने फीडबैक दिया था। इसके बावजूद सफाई सेवा के मामले में कैथल शहर बुरी तरह से पिछड़ गया है। अधिकारी अब सुधार करने की बात कर रहे हैं।
नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार पूरे देश में कैथल शहर को 304वां रैंक मिला है। जो पिछले साल 199 था। इस तरह से जिला साफ सुथरे शहरों की श्रेणी में 105 अंक और पिछड़ गया है। बताया तो यह भी जा रहा है कि सर्वे में कुल 374 शहर शामिल थे। जिनमें से कैथल सबसे पिछड़े शहरों में शुमार हो गया है।
रात्रिकालीन सफाई व डोर टू डोर टेंडर पर चलता रहा विवाद
मार्च 2020 में स्वच्छता सर्वेक्षण हुआ था। जिसमें सिटीजन फीडबैक, ओडीएफ, सफाई, कचरामुक्त शहर आदि के अंक दिए गए हैं। सर्वेक्षण के समय डंपिंग साइट में प्रोसेसिंग प्लांट ही चालू नहीं था। तब तक डंपिंग यार्ड पर लगे कचरे के ढेर को खत्म नहीं किया जा सका था। कचरा मुक्त शहर के करीब 2400 अंक थे। इसके अलावा रात्रिकालीन सफाई का टेंडर भी रद्द था। सर्वेक्षण के समय भी शहर में कई जगहों पर कचरे के ढेर लगे हुए नजर आए थे। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। अभी तक भी रात्रिकालीन टेंडर नहीं छोड़ा जा सका है। एसडीएम ने डोर टू डोर टेंडर रद्द करते हुए एक माह में टेंडर छोड़ने की बात कही थी, लेकिन इस दिशा में अभी तक काम नहीं हो पाया है। तमाम प्रयासों के बावजूद शहर की रैंकिंग सुधरने की बजाय बिगड़ गई है। जब से पार्षदों का कार्यकाल खत्म हुआ है, इसके बाद से स्थिति में और भी गिरावट आई है। शहर में सामुदायिक व पब्लिक शौचालयों की स्थिति बेहाल है।
नगर परिषद में स्वच्छ भारत मिशन के जिला इंचार्ज कुलदीप ने बताया कि अब शहर ओडीएफ प्लस की श्रेणी में आ गया है। डंपिंग यार्ड से कचरा खत्म करते हुए प्लांट काम कर रहा है। इसके अलावा डोर टू डोर व रात्रि कालीन सफाई के टेंडर व कचरे के उठान के लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जा रही है। इस बार उम्मीद है कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग में अच्छा सुधार आएगा।
नगर परिषद सचिव मोहन लाल ने कहा कि पिछले साल की स्थिति में करीब 105 अंक की गिरावट आई है। इसे सुधारा जाएगा। रैंकिंग गिरने के कई कारण है। सभी बातों पर ध्यान देकर इसमें सुधार किया जाएगा। शौचालयों के रख-रखाव का टेंडर भी छोड़ दिया गया है।
ईओ कुलदीप सिंह ने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में 100 से अधिक अंकों की रैंकिंग का गिरना चिंताजनक है। संभवत: सभी क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है। इसमें सुधार पर काम किया जाएगा। अगले सर्वेक्षण में निश्चित रूप से इस रैंकिंग को कम करके 100 से 150 के बीच में लाया जाएगा।