रोडवेज कर्मचारी यूनियन के नेता बलवान कुंडू व महाबीर संधू ने कहा कि बीएस-6 तकनीक के बदले बीएस-3 और 4 की बसें कैथल डिपो में भेजना यात्रियों के साथ खिलवाड़ है। भला खराब बसों में कैसे यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा कर पाएगा। दूसरा यह है कि इन बसों को लंबे रूटों पर भी नहीं दौड़ाया जा सकता है। संधू ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले साल भी सरकार ने कैथल डिपो में दिल्ली डिपो की बीएस-3 तकनीक की आठ बसों को भेजा था, जो एक साल बाद भी कंडम हो चुकी हैं।
रोडवेज वर्कशॉप में कार्यरत कर्मी बलजीत सिंह ने बताया कि जो बीएस-3 और 4 तकनीक की बसें आई हैं। इन्हें ठीक करने और इनकी अन्य मरम्मत को लेकर काफी अधिक समय लगेगा। कहा कि यह बसें बेहद अधिक खराब हैं। यहां तक की बॉडी तक का लोहा भी काफी खराब है। ऐसे में इन बसों में यात्रियों का सफर करना खतरे से खाली नहीं होगा।
रोडवेज कर्मचारी नेता व चालक कृष्ण किच्छाना ने कहा कि वे बीएस-6 तकनीक की बजाय बीएस 3 व 4 तकनीक की बसें भेजने का पुरजोर विरोध करते हैं। यदि सरकार ने अपने फैसले को वापस नहीं लिया तो एक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
कैथल से झज्जर 35
कैथल से भिवानी 07
कैथल जींद 07
सरकार के आदेशों पर एनसीआर क्षेत्र में बीएस-6 तकनीक की बसों के संचालन को लेकर हाल ही में एक कमेटी का गठन हुआ है। इस कमेटी के आदेशों के तहत ही बसों को बदला जा रहा है। कैथल जिला अभी एनसीआर क्षेत्र में नहीं आता है। इस स्थिति में सरकार ने बीएस-6 तकनीक की बसों को दूसरे जिलों में भेजने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत ही बसों को भेजा गया है और उनके स्थान पर बीएस-3 और 4 तकनीक बसें कैथल में आई हैं। -कमलजीत चहल, महाप्रबंधक, कैथल डिपो।