हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 7 और 8 अगस्त को चार सत्रों में परीक्षा ली जानी थी। इसके लिए 4 प्रश्न पत्र तैयार किए गए थे। इन चारों प्रश्न पत्रों के आगे 4-4 ए, बी, सी और डी कोड भी बनाए गए थे। कोड अनुसार बनाए गए प्रश्न पत्रों में केवल प्रश्न पत्रों की संख्या आगे पीछे थी। प्रश्न सभी कोड के प्रश्न पत्रों में एक ही जैसे थे। इसी कारण सबसे पहले प्रश्नपत्र लीक करने वाले आरोपी प्रेस के कर्मचारी जितेंद्र ने 7 अगस्त के सुबह एवं शाम को होने वाली परीक्षा के एक-एक प्रश्न पत्र और 8 अगस्त को होने वाली परीक्षा का एक-एक प्रश्न पत्र निकाल कर लीक किया था।
आंसर-की इस बार इस तरह से लीक की गई थी कि आंसर-की को गिरोह के सदस्य परीक्षा केंद्र के अंदर नहीं पहुंचाएंगे। वे परीक्षा से पहले आंसर-की उपलब्ध करवा देंगे। जिसको याद करके या फिर किसी तरह से उत्तर नोट करके अंदर ले जाने की जिम्मेवारी उम्मीदवारों की थी। गिरोह सदस्य केवल आंसर-की उपलब्ध करवाने के लिए 15 से 18 लाख रुपये में धड़ाधड़ सौदे करते रहे। जो महज 6 लाख रुपये में प्रेस के कर्मचारी ने बेची थी। इसके बाद इसकी कीमत आगे बढ़ते बढ़ते कई करोड़ पहुंच गई।
पुलिस अब तक इस मामले में 28 आरोपियों को गिरफ्तार करके 30 मोबाइल फोन, 4 गाड़ी, 18 लाख 87 हजार रुपये नकदी, दो खाली चेक, लैपटॉप, कंप्यूटर, सीपीयू व रंगीन प्रिंटर तथा अन्य कागजात बरामद कर चुकी है। पुलिस के अनुसार अभी तक की जांच में 88 लोगों की प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने आ चुकी है। जिसमें से 60 लोगों की गिरफ्तारी शेष है।
पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले 7 अगस्त को जींद के गांव खापड़ निवासी संदीप और गौतम व प्यौदा निवासी नवीन को आंसर-की सहित काबू किया था। इसके बाद बालाजी अकादमी संचालक रमेश, रमेश व किच्छाना निवासी राजेश को काबू किया। उनके पास से जानकारी के बाद नरेंद्र, उसके बाद राजकुमार और बाद में जम्मू एवं कश्मीर से प्रेस से जुड़े लोगों व मध्यस्थता करवाने वाले एजाज को काबू किया।