शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार सोमवार को कक्षा प्रथम से लेकर तीसरी कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक पाठशालाओं को खोल दिया गया। छह महीने से भी ज्यादा समय से घर बैठकर पढ़ाई कर रहे छोटे बच्चों को कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच स्कूलों में बुलाया गया। एक ओर जहां बच्चों के तापमान की जांच स्कूलों में प्रवेश से पहले ही की गई। वहीं दूसरी ओर बिना मास्क के पहुंचे विद्यार्थियों को स्कूल प्रबंधन की ओर से मास्क उपलब्ध करवाए गए। इससे पूर्व अभिभावकों से भी बच्चों को स्कूलों में भेजने की अनुमति ली गई।
विभाग ने प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार जिले में प्रथम से तीसरी कक्षा तक के करीब 30 हजार विद्यार्थी हैं। हालांकि कक्षाओं में 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही बुलाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या विभिन्न स्कूलों में करीब 40 प्रतिशत ही रही। साढ़े 12 हजार के करीब विद्यार्थी कक्षाओं में पहुंच पाए, निकी उपस्थिति को अवसर एप पर भी डाला गया। सुबह साढ़े आठ बजे से लेकर दोपहर साढ़े 12 बजे तक ही स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ने की अनुमति दी गई।
गहन जांच के बाद ही कक्षाओं के बैठे बच्चे
कक्षाओं में जाने से पूर्व विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच गहनता से की गई। सबसे पहले मुख्य द्वार पर ही बच्चों के हाथ सैनिटाइज करवाए गए। उसके बाद कक्षा कक्षों में भी सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई। दिन में करीब पांच बार बच्चों का तापमान जांचा गया।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने बताया कि अभिभावकों की सहमति से ही बच्चों को स्कूलों में बुलाया गया। कोरोना से बचाव को लेकर बनाए गए सभी नियमों का स्कूलों में पालन किया गया। विभाग की ओर से स्कूलों में सभी प्रबंध किए गए हैं, ताकि बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी न आए।