कैथल। शहर के दो प्रमुख कॉलेजों में दो मेधा सूची और भौतिक सत्यापन के बाद सीटों में अंतर नजर आया। आरकेएसडी कॉलेज में आंकड़ों के अनुसार 1185 विद्यार्थियों के दाखिले हो चुके थे।
वहीं राजकीय कॉलेज में सीटें भरना तो दूर इतने दाखिले भी नहीं हुए कि पाठ्यक्रमों को नियमित रखा जा सके। राजकीय कॉलेज में कईं पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वालों की संख्या 10 भी नहीं हो सकी है। हालात ये है कि दो मेधा सूची और भौतिक सत्यापन के बाद राजकीय कॉलेज में 58 प्रतिशत से ज्यादा सीटें खाली पड़ी हैं।
वहीं आरकेएसडी कॉलेज में करीब 70 प्रतिशत तक सीटें भर चुकी हैं और महज 30 प्रतिशत सीट ही खाली हैं।
जानकारी के अनुसार दाखिला लेने के लिए विद्यार्थियों का रुझान सरकारी कॉलेज के बजाय निजी कॉलेजों की ओर बढ़ रहा है। इसलिए राजकीय कॉलेज में कईं ऐसे पाठ्यक्रम हैं जिनमें हर साल दाखिलों के लिए विद्यार्थी ही नहीं मिलते, क्योंकि विद्यार्थियों को इन पाठ्यक्रमों के महत्व के बारे में ही जानकारी नहीं होती है।
राजकीय कॉलेज में तो न तो कोई हेल्प डेस्क बनाया गया था और ना ही किसी तरह का दाखिलों के संबंध में कॉलेज की ओर से कोई प्रचार नहीं किया गया। संवाद