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Jind News: सिलिंडर संकट से परेशान महिलाओं ने चूल्हे पर खाना बनाने का लिया फैसला

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27जेएनडी20: गैस किल्लत को लेकर चूल्हे पर खाना बनाने की पहल करती महिलाएं। ग्रामीण
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जींद। एलपीजी गैस संकट के बीच जींद शहर से 14 किमी दूर बसे रधाना गांव की महिलाओं ने पंचायत कर तय किया कि गैस समस्या दूर होने तक पारंपरिक चूल्हे पर ही खाना बनाएंगी। शुक्रवार सुबह गांव में एकत्रित हुईं महिलाओं ने इस मुहिम की शुरुआत भी कर दी। गांव की आबादी 5300 के करीब है।
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महिलाओं का कहना है कि कई दिनों से गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं जिससे घर का कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्हें चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाओं में बिमला देवी, कमलेश देवी, भतेरी, सरोज, राजबाला, मूर्ति देवी, कमला, संगीता और मोनिया समेत कई शामिल रहीं।
बिमला देवी ने बताया कि पहले की महिलाएं चूल्हे पर खाना बनाने में सक्षम थीं लेकिन आज की पीढ़ी को इसकी आदत नहीं रही। अब बुजुर्ग महिलाएं बहू-बेटियों को चूल्हा जलाना सिखाएंगी। संगीता ने कहा कि चूल्हे से निकलने वाला धुआं महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण बनता है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उज्ज्वला योजना के तहत सस्ता सिलिंडर देने की बात करती है लेकिन समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही।
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कमला ने बताया कि सुबह के समय बच्चों को स्कूल भेजने और परिवार के लोगों के काम पर जाने की जल्दी रहती है लेकिन चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय लगता है। उन्होंने सरकार से गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
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मोनिया ने कहा कि गैस आने के बाद अधिकांश घरों में चूल्हे का इस्तेमाल लगभग बंद हो गया था लेकिन अब स्थिति बदल गई है। महिलाएं गैस के लिए लंबी लाइन में लगने की बजाय खुद ईंधन जुटाकर चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
वर्जन
करीब 20 दिनों से गैस सिलिंडर की किल्लत बनी हुई है। लोगों को तीन-चार दिन तक लाइन में लगने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। गैस और तेल का संकट अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण उत्पन्न हुआ है। ऐसे में नागरिकों को भी संयम रखना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के इस फैसले को सराहनीय बताया।
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-सुनील चहल, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ
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