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प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था पर विधानसभा में सरकार को घेरेंगे : भूपेंद्र हुड्डा

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पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता भूपेेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में किसानों का धान तो बिक नहीं रहा, लेकिन नौकरियां इस प्रकार बिक रही हैं जैसे किराना की दुकान पर सामान बिकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था भी बिगड़ रही है। इस मामले पर आने वाले विधानसभा सत्र में सरकार को घेरा जाएगा। साथ ही हुड्डा ने कहा कि नौकरियों में भ्रष्टाचार की जांच हाईकोर्ट के जज से करवाई जाए।
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भूपेंद्र हुड्डा करीब दस दिन पहले जींद में हुई ठेकेदार की हत्या के मुद्दे पर शुक्रवार को जींद पहुंचे थे। उन्होंने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान व्यापारियों ने जींद में लगातार बढ़ रहे अपराध का मुद्दा उठाया। साथ ही हुड्डा ने ठेकेदार श्याम सुंदर के घर पहुंचकर शोक भी जताया। मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते प्रदेश जहां प्रति व्यक्ति आय व निवेश में नंबर एक पर था, अब अपराध व बेरोजगार में नंबर एक पर आ गया है। प्रदेश में अपराध की स्थिति यह है कि हर वर्ग डरा हुआ है। अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं। सरकार के पारदर्शी व मेरिट पर नौकरियां देने के दावे अटैचियों में मिल रहे हैं। इस मौके पर जुलाना से कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक, इंदूराज नरवाल, सुभाष गांगोली, पूर्व प्रत्याशी धर्मेंद्र ढुल, पूर्व विधायक परमेंद्र ढुल, सुरेश गोयत झांझ, महावीर कंप्यूटर, दीपक पिंडारा, संजय बीबीपुर मौजूद रहे।
दुकान का मालिक कौन
इस दौरान हुड्डा ने कहा कि इस मामले में अभी डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी ही सामने आए हैं। यह तो दुकान के सेल्समैन हैं। जांच होनी चाहिए कि भ्रष्टाचार की इस दुकान का मालिक कौन है। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रकार की जांच से बच रही है। हुड्डा ने कहा कि वे नहीं कहते कि यह सब किसने करवाया है, लेकिन सरकार जांच से बच रही है। उन्होंने कहा कि उनके सत्ता में आने पर इन सभी मामलों की जांच होगी और अपराधियों से सख्ती से निपटा जाएगा।
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सरकार मांगे तो मैं दे दूं मरने वाले किसानों के नाम
एक सवाल के जवाब में हुड्डा ने कहा कि सरकार कह रही है कि किसान आंदोलन में मरने वाले किसानों के नाम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर जान गंवाने वाले किसानों का पोस्टमार्टम हुआ है। ऐसे में यदि सरकार मांगे तो वे भी ऐसे किसानों की सूची दे सकते हैं।
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