जींद। दक्षिण हरियाणा के बाद अब जींद में भी डीएपी का संकट गहराने लगा है। 25 अक्तूबर से गेहूं की बिजाई शुरू हो चुकी है और किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल पा रही है। डीएपी के लिए किसान सुबह से ही कतार में लग जाते हैं। कुछ किसान तो घर से खाना लेकर भी आते हैं। वे यही लाइन में लगे हुए खाना खाते हैं, ताकि उन्हें खाद मिल सके।
जींद की पुरानी अनाज मंडी स्थित हैफेड के खाद बिक्री केंद्र पर इस मौसम में डीएपी पहुंचा ही नहीं है। ऐसे में किसानों को निजी दुकानदारों से डीएपी लेना पड़ा रहा है। जिले में वीरवार को महज 11929 बैग डीएपी का स्टॉक है, लेकिन गेहूं के सीजन में छह लाख बैग से अधिक की खपत होती है। हालांकि अब तक जिले में करीब 94 हजार बैग डीएपी बिक चुका है। कृषि अधिकारियों के अनुसार एक सप्ताह में डीएपी के दो रैक आने की उम्मीद है। इनमें करीब एक लाख 20 हजार बैग डीएपी पहुंचेगा। हालांकि अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि दोनों रैक कब पहुंचेंगे।
जिले में हर साल करीब ढाई लाख हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई होती है। इस हिसाब से करीब सवा छह लाख बैग डीएपी की जरूरत होती है। इसके बदले किसानों को गेहूं की बिजाई के सीजन की शुरुआत में ही डीएपी मिलने में परेशानी हो रही है। नरवाना में इफ्को खाद बिक्री केंद्र पर खाद उपलब्ध है। ऐसे में वहां सुबह से ही लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई है। लोग अपने सभी काम छोड़कर सुबह खाद के लिए लाइन में लगते हैं और कई बार तो शाम के समय खाली हाथ लौटना पड़ता है।
लाइन में लगकर कर ही खाते हैं सुबह का खाना
नरवाना में खाद लेने पहुंचे किसान प्रेम सिंह, दर्शनपाल, रघुबीर व प्रीतम ने बताया कि एक किसान को पांच बैग डीएपी ही मिल रहा है। इससे काम नहीं चलता। दो या तीन बार खाद लेने आना पड़ रहा है। डीएपी खाद मिल जाए, इसके लिए सुबह बिना खाना खाए ही जल्दी चलते हैं। खाना साथ लेकर आते हैं और लाइन में लग कर ही खाना खाते हैं। इसके बाद भी कुछ किसानों को बिना खाद लिए ही लौटना पड़ रहा है।
कालाबाजारी के दो मामले आ चुके हैं सामने
डीएपी की किल्लत के चलते कालाबाजारी भी शुरू हो चुकी है। इसके दो मामले सामने आ चुके हैं। नरवाना में इफ्को खरीद केंद्र पर ही खाद के स्टॉक के मिलान में गड़बड़ी पाई गई तो सफीदों में निजी विक्रेता के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है।
सिर्फ जुमलेबाजी कर रही सरकार
कांग्रेस नेता सुरेश गोयत ने कहा कि सरकार सिर्फ जुमले बाजी में उलझी है। किसानों की समस्या को अनदेखा किया जा रहा है। सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन डीएपी के लिए प्रदेश भर में हाहाकार मचा हुआ है। जींद में डीएपी की सबसे कम आपूर्ति है। लोग इससे समझ रहे हैं कि यह भेदभाव है।
जल्द ही डीएपी मिलने की उम्मीद
कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रक डॉ. नरेंद्र पाल ने कहा कि फिलहाल जिले में डीएपी की कमी है, लेकिन किल्लत वाली स्थिति नहीं है। अभी भी करीब 12 हजार बैग डीएपी है। लोग नियमानुसार खाद ले रहे हैं। कालाबाजारी करने वालों से प्रशासन सख्ती से निपट रहा है। जल्द ही दो रैक आने की उम्मीद है। इसके बाद कोई दिक्कत नहीं रहेगी। इसके लिए अधिकारियों से बात चल रही है।