27जेएनडी22: जुलाना में दुकान पर सीलिंग फैन की वाइंडिंग करतीं पूनम रानी। संवाद
जुलाना। हालात चाहे कितने भी मुश्किल हों, यदि हौसला और मेहनत साथ हो तो इन्सान अपनी राह खुद बना सकता है। मालवी गांव की बहू पूनम रानी ने इसे सच साबित कर दिखाया है।
चार साल पहले पति की कैंसर से मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पंखों की वाइंडिंग का काम सीखकर अपने परिवार का सहारा बन गईं। पूनम रानी घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के बाद रोजाना जुलाना स्थित दुकान पर पहुंचती हैं।
सुबह आठ बजे तक घर का काम निपटाने के बाद वह दुकान पर काम शुरू करती हैं और शाम पांच बजे तक सीलिंग फैन की वाइंडिंग करती हैं। वह प्रतिदिन करीब आठ से दस पंखों की वाइंडिंग कर परिवार का खर्च चलाने में योगदान दे रही हैं। उनका कहना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, जरूरत केवल मेहनत और ईमानदारी से काम करने की है।
जेठ ने बढ़ाया हौसला, सिखाया काम
पति की मृत्यु के बाद जब पूनम खुद को असहाय महसूस कर रही थीं, तब उनके जेठ जसमेर ने उन्हें हिम्मत दी। दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर जसमेर ने उन्हें बेटी की तरह समझाते हुए कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। उनके प्रोत्साहन से पूनम ने वाइंडिंग का काम सीखा और आज आत्मनिर्भर होकर परिवार संभाल रही हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान
पूनम का बड़ा बेटा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएलबी कर चुका है। बेटी बीए की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटा बेटा 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है। पूनम कहती हैं कि महिलाओं को अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि शिक्षा ही उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने का सबसे मजबूत माध्यम है।