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Jind News: जयंती देवी मंदिर में मंगल गीत गाकर किया तुलसी विवाह

Mon, 03 Nov 2025 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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जींद। कार्तिक शुक्ल द्वादशी पर जयंती देवी मंदिर में रविवार को तुलसी विवाह का उत्सव मनाया गया। भक्तों की भीड़ ने मंदिर परिसर में तुलसी की सुगंध में मंगल गीत गाए।
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मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि तुलसी विवाह हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है जो देवउठनी एकादशी के अगले दिन मनाया जाता है। तुलसी माता को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माना जाता है। इस विवाह से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है।
शालिग्राम का रूप धारण कर भगवान विष्णु का विवाह तुलसी से कराया जाता है जो लक्ष्मी-नारायण के दिव्य मिलन का प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि और त्रिपुष्कर योग का संयोग बनने से यह विवाह और भी शुभ फलदायी है लेकिन रविवार होने से तुलसी को स्पर्श किए बिना पूजा की गई।
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भक्तों ने दूर से ही जल अर्पित किया और सामग्री चढ़ाई। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:35 बजे से प्रदोष काल में शुरू हुआ। मंदिर में तुलसी पौधे को पहले से ही स्वच्छ किया गया था। लाल चुनरी, सिंदूर, हल्दी, चंदन, फूल, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री से तुलसी का शृंगार किया गया।
शालिग्राम को दूल्हे के रूप में सजाया गया, जिसमें पीले वस्त्र, मोती की माला और धूप-दीप अर्पित किए गए। मंडप सजाया गया जहां मंगल गीतों के बीच फेरे लिए गए। भजन-कीर्तन और आरती के साथ विवाह संपन्न हुआ।
तुलसी विवाह के नियम
शास्त्री ने पूजा विधि के बारे में बताया कि सबसे पहले तुलसी को स्नान कराकर मंडप में स्थापित करें। फिर शालिग्राम की पूजा करें। विवाह मंत्रों का जाप करते हुए माला और धागे से बंधन बांधें। अंत में प्रसाद वितरण करें। रविवार पर तुलसी पत्ते न तोड़ें, केवल मिट्टी में जल दें। इससे पितृ दोष भी नष्ट होता है। उन्होंने जोड़ा कि तुलसी विवाह के बाद शुभ कार्यों का आरंभ होता है जो चातुर्मास के समापन का संकेत है।
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