जींद। कृषि कानूनों के मुद्दे पर सरकार के साथ अब किसान भी लंबी लड़ाई लड़ने के मूढ़ में हैं। इसके लिए भारतीय किसान यूनियन गांव-गांव में संगठन को मजबूत करने पर जोर दे दिया है। रविवार को जाट धर्मशाला में भाकियू (चढूनी) के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मधाना पहुंचे और किसानों से 23 जनवरी को ही ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली कूच करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है, चाहे देश बर्बाद हो जाए वह मानने वाली नहीं है।
पत्रकारों से बातचीत में मधाना ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले यह संघर्ष जारी है। 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर किसान दिल्ली के लिए कूच करेंगे। हर घर से एक किसान आंदोलन में हिस्सा लेगा। इसके अलावा 18 जनवरी सोमवार को महिला किसान जिले में पैदल जुलूस निकालेंगी और सभी धरनों की अध्यक्षता महिलाएं ही करेंगे। महिला वक्ता लोगों को कृषि कानूनों के बारे में बताएंगी और आंदोलन को मजबूती देंगी। किसान एकता मंच की जिलाध्यक्ष सिक्किम सफा खेड़ी ने कहा कि 18 जनवरी को महिला दिवस के दिन महिलाएं घर का चूल्हा छोड़कर धरना स्थल पर पहुंचेगी।
मधाना ने कहा कि सरकार और उसके लोग आंदोलन को लेकर भ्रम फैला सकते हैं, इसलिए सगंठन के लोगों की बात को ही सही माना जाए। अब तक नौ बैठक हुई लेकिन सरकार कोई हल नहीं निकाल पाई। जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती और एमएसपी की गारंटी नहीं देती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। इसके लिए चाहे एक वर्ष का समय लगे या फिर पूरा जीवन, किसान वापस नहीं लौटेंगे। आरोप है कि सरकार किसानों को बदनाम करना चाहती है। वह कभी किसान आंदोलन को कांग्रेस का आंदोलन, खालिस्तानी, आतंकवादी या टुकड़े-टुकड़े गैंग बताती है लेकिन किसान इस तरफ कोई ध्यान नहीं देगा क्योंकि उसका सीधा लक्ष्य केवल कृषि कानूनों को रद्द करवाना और एमएसपी की गांरटी लेना है।
गांव में नहीं घुसने देंगे नेताओं को
घोघड़ियां गांव के पूर्व सरपंच बिजेंद्र की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में सर्व सम्मति से फैसला लिया गया कि गांव में जितने भी ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं, सभी दिल्ली कूच करेंगे। प्रत्येक घर से एक किसान आंदोलन में हिस्सा लेगा। जितेंद्र बूरा ने कहा कि गांव से इसके अलावा छह लाख रुपये चंदा एकत्रित किया गया है जो टीकरी बॉर्डर पर बैठे किसानों को दिया जाएगा। 20 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसके अलावा यदि गांव में कोई भी सरकारी कर्मचारी या नेता घुसता है तो उसको बंधक बनाया जा सकता है। बैठक में रणधीर बूरा, रामकुमार, सुरेंद्र, सूरजमल, राकेश आर्य, जयकिशन, संदीप, सोनू, दीपू, जोगेंद्र, जंगशेर, विक्रम बूरा मौजूद रहे।
जामनी से कई महीनों का राशन लेकर किसान दिल्ली सीमा पर रवाना
जामनी गांव से किसान कई महीनों का राशन लेकर रविवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए। किसान अपने साथ देसी घी के सात टिन, दस क्विंटल चीनी, 20 क्विंटल आटा, 5 क्विंटल दाल, 5 क्विंटल चावल लेकर निकले हैं। दिनेश सिंगरोहा, राजेश व सुशील ने कहा कि जब तक कृषि कानून रद्द नहीं हो जाते, वह लौटने वाले नहीं।
महिला जुलूस के लिए ली बैठक : जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव सविता व जिला कोषाध्यक्ष नूतन ने सोमवार को महिला जुलूस निकाला जाएगा। इसके लिए शामलो कलां, खामलो खुर्द, खरेंटी, ढिगाना के अलावा शहर की कई कॉलोनियों का दौरा कर महिलाओं को अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। इस मौके कृष्णा ढांडा, सतवंती, सरोज, सुनीत व सुदेश भी मौजूद रही।
नरवाना हलके के गांवों में निकाली ट्रैक्टर यात्रा
बद्दोवाल टोल प्लाजा से सैकड़ों किसानों ने उझाना, बेलरखां समेत कई गांवों में रविवार को ट्रैक्टर यात्रा निकाली। इस दौरान किसानों ने 26 जनवरी में राजपथ पर निकाली जाने वाली ट्रैक्टर परेड में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान कया। किसान नेता मास्टर बलबीर सिंह ने कहा कि दिल्ली में 26 को इतने ट्रैक्टर पहुंच जाएंगे कि वह दिल्ली की सड़कों छोटी पड़ जाएंगी। पूरी दिल्ली जाम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर एक कमेटी बनाकर किसानों को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया जा रहा है।
बद्दोवाल टोल पर पहुंची ट्रैक्टर यात्रा। संवाद- फोटो : Jind