जींद। जिले में दिन-प्रतिदिन डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डेंगू मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। ऐसे में इन मरीजों को रक्त से प्लेटलेट्स अलग करके चढ़ाए जाते हैं, लेकिन आज तक जिले में इस प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। नागरिक अस्पताल में ब्लड सेपरेशन यूनिट लग चुकी है, इसका निरीक्षण भी हो चुका है, लेकिन लाइसेंस नहीं मिलने के कारण यह मशीन शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में डेंगू मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए हिसार या फिर रोहतक पीजीआई में जाना पड़ रहा है।
चार वर्ष पहले नागरिक अस्पताल में मरीजों को प्लाज्मा, आरबीसी, प्लेटलेट्स की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट लगनी थी। इस मशीन के कुछ पार्ट्स नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में आ भी गए थे, लेकिन अन्य भाग नहीं आए। इसके बाद स्वास्थ्य निदेशालय के आदेश पर इन पार्ट्स को अंबाला के नागरिक अस्पताल में भेज दिया। एक वर्ष पहले इस मशीन के कुछ पार्ट्स नागरिक अस्पताल में पहुंचे थे। इस मशीन के कुछ पार्ट्स और आने थे, लेकिन वह नहीं आ पाए।
छह महीने पहले इस मशीन के सभी पार्ट्स आ गए। चार महीने पहले इस मशीन को इंस्टाॅल भी कर दिया। जब ड्रग कंट्रोलर व स्वास्थ्य निदेशालय की टीम ने मशीन का निरीक्षण किया तो इसमें कुछ खामियां पाई गईं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन खामियाें को दूर किया। 2 अगस्त को फिर से निदेशालय की टीम ने निरीक्षण किया। इस दौरान सब कुछ ठीक पाया। टीम ने कहा कि वह दो महीने में लाइसेंस भेज देगी, लेकिन अभी तक तक लाइसेंस नहीं मिला पाया है। इस कारण लोगों को इस मशीन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। लाइसेंस मिलने के बाद ही मशीन शुरू हो पाएगी।
एक ब्लड यूनिट से चल सकता है तीन मरीजों का काम
जिन मरीजों का सड़क दुर्घटना या ऑपरेशन के समय ब्लड अधिक निकल जाता है, उन मरीजों को होल (पूरे) ब्लड चढ़ाया जाता है लेकिन अन्य मरीजों में बीमारी के कारण प्लाज्मा, आरबीसी प प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं, इसलिए इन मरीजों को ब्लड के यही पार्ट्स चढ़ाए जाते हैं। थैलेसीमिया मरीज को आरबीसी, स्वाइन फ्लू, डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों में प्लेटलेट्स तथा क्रियोनिक बीमारियों में मरीज को प्लाज्मा की जरूरत होती है। ऐसे में इन मरीजों को होल ब्लड चढ़ाया जाए तो उससे मरीज के शरीर में ब्लड की मात्रा बढ़ जाती है और उसे हृदयाघात का खतरा हो जाता है। बच्चों को भी होल ब्लड नहीं दिया जा सकता। बच्चे में जिस कंपोनेंट की कमी होती है, वही दिया जाता है। ऐसे में एक ब्लड यूनिट तीन मरीजों के काम आ सकती है।
वर्जन
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट पूरी तरह से तैयार है। इसका निरीक्षण भी हो चुका है। टीम ने 15 दिन में लाइसेंस भेजने की बात कही थी। एक-दो दिन में ही लाइसेंस मिल जाएगा, उसके बाद यूनिट शुरू कर दी जाएगी।
-डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।