जींद। सेरेब्रल पाल्सी का अभी कोई उपचार नहीं है। यदि समय पर बीमारी की पहचान हो तो चिकित्सकीय मदद से सिर्फ कुछ राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इसका शत प्रतिशत इलाज नहीं, सिर्फ मूवमेंट में सुधार संभव है। यह बात साइकोलॉजिस्ट डॉ. ज्योति ने दिव्यांग और उनके परिजनों को संबोधित करते हुए कही।
विश्व सेरेब्रल पाल्सी दिवस पर सोमवार को भिवानी रोड पर स्थित दर्पण कम्युनिकेशन सोसाइटी के दर्पण रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च सेंटर में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। संस्थान निदेशक डॉ. आशुतोष ने मुख्य अतिथि साइकोलॉजिस्ट डॉ. ज्योति का स्वागत किया। दिव्यांग बच्चों ने पोस्टर और रंगोली बनाकर लोगों को जागरूक किया।
डॉ. ज्योति ने कहा कि सेरेब्रल पाल्सी एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो जन्म से ही बच्चों में देखने को मिलती है। इस बीमारी को विकलांगता की श्रेणी में रखा गया है। इससे पीड़ित बच्चे के ब्रेन का विकास आम बच्चों की तुलना में कम होता है।
इसके कारण उनका ब्रेन फंक्शन प्रभावित होता है। ब्रेन के जिस हिस्से पर इसका असर होता है, उस हिस्से से संबंधित अंग भी इसके कारण प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में मरीज का शारीरिक संतुलन भी ठीक से नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी के अलग-अलग लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मरीज सेरेब्रल पाल्सी के बावजूद चल-फिर सकते हैं जबकि कुछ को सहारा लेना पड़ता है जबकि कुछ बिल्कुल भी नहीं चल सकते। कुछ लोगों में मिर्गी, अंधता और बहरापन की भी समस्या हो सकती है।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि सेरेब्रल पाल्सी का अटैक किस समय हुआ है और कब से इलाज चल रहा है। इसका शत प्रतिशत इलाज नहीं है लेकिन कुछ हद तक मूवमेंट को सही किया जा सकता है।
विशेष शिक्षा विशेषज्ञ मीनू शर्मा ने कहा कि हमें इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि वे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे का जल्दी उपचार शुरू कर सकें। इस अवसर पर दर्पण सोसायटी के सदस्य डॉ. आशुतोष कौशिक, डॉ. राजेश्वर, अर्चना, जयपाल, को-ऑर्डिनेटर अमित, लेक्चरर दीप्ति, दीक्षेश, मुख्तयार सिंह,ऑडियोलॉजिस्ट डॉ. वरुण गर्ग, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रवीण, साइकोलॉजिस्ट डॉ. मनीष, विशेष शिक्षक भारती, राज रानी, प्रमोद, सुनैना, लक्ष्मी नारायण, सतविंदर, नवनीत कौर, अनिता मौजूद रही।