बद्दोवाल टोल पर खड़ी एंबुलेंस। संवाद
जींद। सड़क हादसे में घायलों के प्राइवेट अस्पताल में जाने पर उनका डेढ़ लाख रुपये तक का फ्री इलाज की सुविधा सरकार देती है। अब यह सुविधा तीन सितंबर के बाद से किसी भी दुर्घटना में घायल को नहीं मिल पा रही। इसका कारण है कि प्रदेश स्तर पर पोर्टल ही बंद किया गया है। इस पोर्टल का नया वर्जन आने का इंतजार बना हुआ है।
इसके कारण घायलों को अपनी जेब से राशि खर्च करके ही इलाज करवाना पड़ रहा है। ऐसे में सड़क हादसे में घायल यदि निजी अस्पताल पहुंचाए जाते हैं तो उनको अपनी जेब से ही राशि खर्च करनी पड़ेगी। जिले में 58 आयुष्मान पैनल के अस्पताल इस योजना में शामिल किए गए हैं। इसमें 22 निजी अस्पताल भी शामिल हैं।
सड़क हादसों में घायल लगभग 115 लोगों ने निजी अस्पतालों में इलाज के लिए गए। जिन्होंने इस पोर्टल पर दर्ज हैं जबकि साल भर में 431 सड़क दुर्घटनाए हुई।
इंसेट
डेढ़ लाख रुपये का निशुल्क इलाज मिलता
प्रदेश में सड़क दुर्घटना में घायलों को डेढ़ लाख रुपये का निशुल्क इलाज मिलता है। इसके तहत हादसे के समय से 7 दिनों की अवधि के लिए घायल प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का उपचार होगा। इस योजना के तहत घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाया जाता है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा अपने यहां उपलब्ध ऑनलाइन किया जाता है। इसके बाद यह डाटा पुलिस थाने में भेजा जाता है। नेशनल हाईवे पर जिले में छह एंबुलेंस की सुविधा है। इसके अलावा स्टेट हाईवे पर कोई अतिरिक्त एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। एंबुलेंस की सुविधा के लिए डायल 112 पर सहायता लेनी पड़ती है। नेशनल हाईवे पर पेट्रोलिंग के लिए भी छह गाड़ियां हैं।
इंसेटसरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा
यदि अब सड़क दुर्घटना में घायल होता है और उसे पैनल के निजी अस्पताल ले जाया जाता है तो खुद ही खर्च वहन करना पड़ता है। पोर्टल नहीं चलने के कारण निजी अस्पताल तीन माह से घायलों से संबंधित जानकारी शेयर नहीं कर पा रहे। ऐसे में उनको सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा।