जींद। हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए लखनऊ की टीम रात में ट्रेन की टेस्टिंग कर रही है। आधुनिक तकनीक से लैस देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मानकों के अनुरूप चलाने के लिए बारीकी से जांच चल रही है। टीम का मुख्य फोकस पावर कार और उससे जुड़े सुरक्षा और नियंत्रण उपकरणों पर है।
हाइड्रोजन ट्रेन के दोनों छोर पर लगे पावर कार में एयर प्रेशर, ब्रेकवॉल, हैंडल, गियर वॉल, वाइपर स्विच की जांच की गई। गेज वॉल से यह जानकारी मिल सकेगी कि इंजन में कितनी गैस बची है और ट्रेन कितने किमी. चल सकती है। स्पीड सेंसर, कंट्रोल सिस्टम और ब्रेकिंग मैकेनिज्म को अलग-अलग गति पर परखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ट्रेन निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित रूप से संचालित हो सके। टेस्टिंग के दौरान ट्रेन को धीमी और मध्यम गति पर चलाकर उपकरणों की कार्यक्षमता को रिकॉर्ड किया गया। टेस्टिंग टीम ने ट्रेन के हॉर्न की आवाज और उसकी रेंज को भी जांचा। इसके साथ ही फ्रंट लाइट की रोशनी, उसकी दिशा और दूरी का भी परीक्षण किया गया। रात में दृश्यता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया गया कि फ्रंट लाइट से ट्रैक और आसपास का क्षेत्र पर्याप्त रूप से रोशन हो सके।
इसके अलावा ट्रेन के पायदानों की मजबूती और ऊंचाई की भी जांच की गई। यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या खतरा न हो। टेस्टिंग के दौरान वाइपर की कार्यक्षमता की भी जांच की गई। धुंध, बारिश या नमी की स्थिति में ड्राइवर को स्पष्ट दृश्य मिल सके। इसके लिए वाइपर की गति और सफाई क्षमता को परखा गया।
इंसेट
तीन-चार चरणों में की जाएगी टेस्टिंग
ट्रेन और रेलवे ट्रैक की टेस्टिंग तीन-चार चरणों में की जाएगी। पहले चरण में यांत्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है जबकि अगले चरण में ट्रायल रन के दौरान ट्रेन की स्थिरता, ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया जाएगा। हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन न केवल प्रदूषण रहित है, बल्कि डीजल ट्रेनों की तुलना में कम शोर भी उत्पन्न करती है।
वर्जन
लखनऊ से आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन) की टीम पहुंच चुकी है। उन्होंने टेस्टिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। -संजय, मैनेजर, हाइड्रोजन प्लांट जींद