संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। सुंदर नगर में बाबा जीवन सिंह वेलफेयर समिति ने रविवार को शहीद बाबा जीवन सिंह (जैता) की कुर्बानी को समर्पित कीर्तन दरबार सजाया। इसमें गुरुघर के हजूरी रागी व कथा प्रचारकों ने भाई जैता जी की कुर्बानी पर प्रकाश डाला।
गुरुघर के प्रवक्ता बलविंदर सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के आरंभ में सुखमनी सेवा सोसायटी की ओर से श्री सुखमनी साहिब का पाठ किया गया। इसके बाद सिंह सभा गुरुद्वारा रेलवे जंक्शन के हैडग्रंथी भाई जसवंत सिंह ढिल्लो, बाबा जीवन सिंह की कुर्बानी के इतिहास को संगतों से रूबरू करवाया और बताया कि भाई जैता जी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के साथ शहीद होने गए सिखों में से एक थे।
श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहीदी के उपरांत श्री गुरु गोबिंद साहिब जी ने जालिम सरकार के साथ टक्कर लेने के लिए पांच किले बनवाए थे। खालसा फौज का मुखय जरनैल अमर शहीद भाई जैता जी को बनाया गया था।
भाई जैता जी ने खालसा फौज का नेतृत्व करते हुए भंगाणी, आनंदपुर साहिब, सरसा एवं चमकौर साहिब के युद्धों में हिस्सा लिया। वह चमकौर साहिब की जंग में अपने बहादुरी के जौहर दिखाते हुए 1704 में शहीद हो गए थे।
कीर्तन दरबार में हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डाॅ. कृष्ण मिड्ढा, नगर परिषद अध्यक्ष डा. अनुराधा सैनी, वाइस चेयरमैन अर्चना शर्मा ने शिरकत की। इस मौके पर उन्हें गुरुघर के सर्वोच्च सम्मान सिरपाओं से सम्मानित किया गया।
गुरुघर प्रवक्ता बलविंद्र सिंह ने बताया कि भाई जैता जी (बाद में भाई जीवन सिंह) गुरु तेग बहादुर जी के एक महान और निडर सिख थे। जो दिल्ली से गुरु जी का कटा हुआ शीश (सिर) आनंदपुर साहिब लाकर, उसे सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के लिए लाने के लिए जाने जाते हैं। जिसके बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने उन्हें (रंगरेटा, गुरु का बेटा) कह कर सम्मानित किया था। जो उनकी बहादुरी और निष्ठा का प्रतीक है।
उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह की सेना में एक योद्धा के रूप में सेवा की और चमकौर के युद्ध में बलिदान हो गए। खालसा पंथ की स्थापना के बाद, उन्होंने अमृतपान किया और उनका नाम बदलकर भाई जीवन सिंह हो गया। इस अवसर पर पार्षद प्रतिनिधि हरपाल सिंह, भूपेंद्र सिंह, बाबा जीवन सिंह वेलफेयर समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे।
28जेएनडी07: भाई जसबीर सिंह रमदसिया का रागी जत्था गुरबाणी गायन करते हुए। स्रोत: आयोजक- फोटो : रविवार की शाम होते ही घना कोहरा छा गया। संवाद