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अधिक धान तोलने पर किसान ने किया हंगामा तो कहा हो गई गलती

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धान की अधिक तोल करने पर कांटे को ठीक करवाता किसान। - फोटो : Jind
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किसानों की फसल मंडी में आते ही उनके साथ ठगी का खेल शुरू हो जाता है। शहर की अनाज मंडी में मंगलवार को एक किसान के धान का वजन किया जा रहा था। इस दौरान बोरी में 50 की जगह 52 किलो धान तोला जा रहा था। इस बारे में जब किसान को पता चला तो उसने वजन करने वाले और आढ़ती के मुनीम को हड़काया तो सफाई में कहा गया कि कांटा खिसक गया था। इसकी तरफ उनका ध्यान नहीं था। इसके अलावा मंडी में चल रहे धान खरीद के तोल में प्रत्येक दुकानदार का कांटा 51 किलोग्राम पर बंधा था, जबकि बोरी का वजन 600 ग्राम होता है। प्रत्येक किसान के साथ प्रति बोरी 400 ग्राम की ठगी चल रही है। 1509 व पीआर धान की आवक मंडी में तेजी से हो रही है। धान बेचने आए किसानोें को धान में नमी और बोरी का वजन एक किलो बताकर लूटा जा रहा है। मजबूरन किसान विरोध नहीं कर रहे हैं। अगर कोई किसान अधिक धान तोलने के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे धान में नमी होने की बात कहकर दो से तीन दिन तक सुखाने के लिए कहा जाता है। इसके बाद किसान अपनी आवाज को दबाना ही उचित समझता है।
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बोली नहीं होने से उचंती पर लुट रहा धान
किसानों ने कहा कि मंडी में धान की बोली नहीं होने के कारण किसानों से उचंती पर ही धान खरीद का सिलसिला जारी है। इसके कारण किसान को धान का उचित दाम नहीं मिल रहा है। इसमें व्यापारी आता है, धान को देखकर मनमर्जी से भाव बताकर आगे चला जाता है, जबकि मंडी में बोली होती तो किसान की फसल को उचित दाम मिलते। बोली नहीं होने के कारण किसान अपनी धान को व्यापारियों को बेचकर नहीं सौंपकर जा रहे हैं।
धर्मकांटे पर दिखावा शुरू, नहीं हो रहा तोल
मंडी के गेट पर बने धर्म कांटे पर मंगलवार को दिखावा तो शुरू हुआ, लेकिन वास्तव में इस पर कोई काम नहीं हुआ। एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मंडी में लगे कांटे पिछले लंबे समय से खराब हैं। इनको ठीक ही नहीं करवाया गया। इस धर्मकांटे पर एक भी धान की ट्रैक्टर-ट्राली का वजन नहीं किया गया।
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तोल में चल रही थी गड़बड़ : बलबीर
इगराह निवासी किसान बलबीर ने बताया कि वह 1509 धान बेचने के लिए मंडी में आया हुआ था। वह अपना धान उचंती पर बेचकर एक तरफ बैठ गया। जब उसने देखा कि कांटा 52 किलोग्राम पर बंधा हुआ तो उसने विरोध किया। इससे उसका प्रत्येक बोरी के साथ एक किलो 400 ग्राम धान ज्यादा जा रहा था। उसने विरोध किया तो कांटे को ठीक किया गया।
धान की बोरी का नहीं होता निर्धारित तोल
धान की बोरी का निर्धारित तोल नहीं होता। पीआर धान की जो सरकारी खरीद होती है, उसमें बोरी का वजन 600 ग्राम होता है। कई बार टाकियां लगी बोरी होती हैं। इनमें ज्यादा वजन होता है। इसके कारण 51 किलोग्राम पर कांटे को बांधा जाता है। धर्मकांटे कई बार ठीक करवाए यह जल्दी ही खराब हो जाते हैं।
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-पवन चोपड़ा, मार्केट कमेटी सचिव, जींद अनाज मंडी।
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