जींद। नगर की गुरुद्वारा गली स्थित श्री हरि संकीर्तन भवन में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ। व्यास दीप वशिष्ठ ने कहा कि कथा श्रवण से ही भगवान श्रीहरि भक्त के हृदय में विराजमान हो जाते हैं। कहा कि कलियुग के समस्त दोषों का नाश भागवत कथा के श्रवण से संभव है।
श्रीमद् भागवत एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। इसके नियमित पठन-श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति सहज हो जाती है और मन की शुद्धि के लिए इससे श्रेष्ठ कोई साधन नहीं है। उन्होंने बताया कि कलियुग के समस्त दोषों का नाश भागवत कथा के श्रवण से संभव है और यह मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त करने का सामर्थ्य रखती है।
उन्होंने कहा कि हजारों अश्वमेध और वाजपेय यज्ञों के बराबर फल केवल श्रीमद् भागवत कथा सुनने से प्राप्त हो जाता है। फल की दृष्टि से गंगा, गया, काशी, पुष्कर या प्रयाग जैसे तीर्थ भी भागवत के समान नहीं हो सकते। केवल पठन और श्रवण ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उसके अर्थ को समझना, मनन करना, चिंतन करना और जीवन में उसे धारण करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भागवत मनुष्य के जीवन के हर पहलू को संतुलित करने में सहायक है। यह दुखों का नाश करने, दरिद्रता और दुर्भाग्य को दूर करने, पापों के निवारण, काम-क्रोध जैसे शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने तथा ज्ञान में वृद्धि करने का सरल उपाय है। इस मौके पर समाजसेवी नरेश मंगला, श्रवण गोयल, महेश गर्ग, महावीर तायल, विजय मंगला आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।