अदालत ने रिश्वत लेने के मामले में खादी बोर्ड के तत्कालीन जिला प्रबंधक को दोषी करार देते हुए पांच साल कैद तथा 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने की सूरत में दोषी को एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार गांव मुआना निवासी सतीश वर्मा ने छह अक्तूबर 2015 को एसपी को शिकायत देकर कहा था कि उसने जिला खादी बोर्ड से प्रधानमंत्री ग्रामीण रोजगार सृजन योजना के तहत ऋण लेने के लिए आवेदन किया था। खादी बोर्ड के तत्कालीन प्रबंधक कुलदीप यह ऋण पास करने की एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। इसके लिए उसने सात हजार रुपये दे दिए जबकि बाकी राशि किश्तों में देने की बात कही। तत्कालीन डीएसपी वीरेंद्र सांगवान के नेतृत्व में छापामार टीम ने सतीश को खादी बोर्ड के प्रबंधक के रिश्वत के पैसे देने के लिए भेजा। सतीश ने जब कुलदीप से संपर्क किया तो उसे दीवानखाना मार्केट में बुलाया। यहां जब सतीश ने कुलदीप को दस हजार रुपये दिए तो इशारा पाते ही विजिलेंस टीम ने कुलदीप को दबोच लिया। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था।