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जलनिकासी के दावे बेमानी, 24 घंटे बाद भी सड़कों से नहीं निकला पानी

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रानी तालाब के पास सड़क पर खड़े पानी के बीच सीवर की सफाई करते नगर परिषद कर्मचारी। संवाद। - फोटो : Jind
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। शहर में वीरवार को केवल 30 एमएम बारिश हुई थी। लेकिन इतनी सी बारिश के 24 घंटे बाद भी शहर की कई सड़कों पर पानी जमा है। पानी निकासी को लेकर नगर परिषद व जनस्वास्थ्य विभाग एक-दूसरे का कार्य बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। इन विभागों की आपसी खींचतान का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। वाहन चालकों व अन्य लोगों का यहां से निकलना मुश्किल हो रहा है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भरने से भी भारी परेशानी लोगों को हो रही है।
गोहाना रोड से रानी तालाब के ऊपर से देवीलाल चौक की तरफ जाते समय सड़क पर काफी पानी जमा है। इसके अलावा नरवाना रोड, देवीलाल चौक, भिवानी रोड, सफीदों रोड पर स्थित एकता नगर कॉलोनी में भी यही स्थिती है। इसका मुख्य कारण नालों की सफाई नहीं होना तथा सीवरेज व्यवस्था का दुरुस्त नहीं होना है। यदि इतनी सी बारिश से शहर के यह हालात हैं तो रोहतक में हुई 188 एमएम बारिश जींद में हो जाती तो शहर के क्या हालात है। इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकारी तो अपना-अपना पल्ला झाड़कर काम चला लेते हैं लेकिन लोगों को भारी परेशानियों से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश से पहले प्रशासन बड़े-बड़े दावा करता है कि बरसाती पानी को जमा नहीं रहने दिया जाएगा लेकिन जरा सी बरसात से ही सड़कों पर जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके साथ ही शहर में बिछाई गई सीवरेज लाइन अक्सर बंद रहती है। बारिश के बाद जगह-जगह बंद हुए सीवरों की सफाई को लेकर शुक्रवार को भी कर्मचारी लगे रहे। रानी तालाब पर नगर परिषद के कर्मचारी पानी के बीच ही सीवरेज की सफाई करते नजर आए। पानी के बीच सीवरेज साफ करने में नगर परिषद कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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रानी तालाब के पास निरीक्षण को रात दस बजे पहुंचे डीसी
रात को लगभग दस बजे डीसी डॉ. मनोज कुमार रानी तालाब के पास पहुंचे और जलभराव का निरीक्षण किया। उन्होंने रानी तालाब से तुरंत पानी की निकासी के निर्देश दिए। रात को ही नगर परिषद कर्मचारी पानी निकासी में लग गए। रात को एक बार तो पानी पूरी तरह से निकल गया था लेकिन सुबह फिर इस सड़क पर पानी भर गया।
उनका कार्य नालों की सफाई व उनकी देखरेख का है। सड़क पर कहीं पानी जमा होता है तो उसके लिए पानी निकालने का रास्ता होना चाहिए। पानी गिरेगा तो कहीं तो जाएगा। यह जनस्वास्थ्य विभाग का कार्य है लेकिन करना उनको पड़ रहा है। रात को दस बजे एक बार तो पानी निकाल दिया था लेकिन फिर से भर गया।
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-सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
विभाग का कार्य सीवरेज व्यवस्था का है। यदि कोई सीवरेज ब्लॉक हो या ओवरफ्लो हो तो वह ठीक करेंगे लेकिन सड़क पर खड़े पानी की निकासी का कार्य उनका नहीं है। यह कार्य नगर परिषद का है।
-दलबीर सिंह, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग
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