जींद। जिले का बीबीपुर गांव महिलाओं को समानता का अधिकार दिलाने के लिए जाना जाता है। वर्ष 2012 में बीबीपुर गांव में पहली महिला महापंचायत हुई थी, जिसके बाद महिलाओं ने भी खापों में अपनी हिस्सेदारी करनी शुरू कर दी। वहीं सेल्फी विद डॉटर, घरों के बाहर बेटियों के नाम से नेम प्लेट और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत जींद की धरती से ही हुई थी।
वर्ष 2012 से पहले महिलाओं ने पूरे देश में कोई पंचायत नहीं की थी। बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर समानता दिलाने के लिए अभियान शुरू किया। उन्होंने बीबीपुर गांव में 14 जुलाई 2012 को पहली महिला महापंचायत का आयोजन किया। इसमें हरियाणा के अलावा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व पंजाब से भी काफी महिलाओं ने शिरकत की। नारी शक्ति ने जब अपने सम्मान की बात उठाई तो उसके बाद खापों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ने लगी।
वर्ष 2012 में ही बीबीपुर गांव से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की गई। बाद में इसे केंद्र सरकार ने भी लागू कर दिया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे का जन्म बीबीपुर गांव में ही हुआ था। नौ जून 2015 को जींद की धरती से ही सेल्फी विद डॉटर अभियान हुआ था। बेटियाें को बेटाें से कम आंकने वाले लोगों पर इस अभियान का काफी असर हुआ। वर्ष 2015 में ही घरों के बाहर बेटियों के नाम से नेम प्लेट लगानी शुरू की गई। इस अभियान को बाद में राज्य सरकार ने भी लागू किया। पूरे देश में आज भी महिलाओं के अधिकाराें को लेकर जींद जिले का नाम आता है। (संवाद)
महिलाओं ने जगाई थी कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अलख
जींद से ही महिलाओं ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अलख जगाई थी। 2013 में महिलाओं ने जींद में पैदल मार्च करके कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने की अपील की थी। महिलाओं ने पुरुषों के बराबर सम्मान का हक जमाया था। इसी का नतीजा है कि पिछले एक साल से जींद जिला लिंगानुपात में पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है।