फल्गु तीर्थ की महत्ता ही स्नान व तर्पण की है। इस अवसर पर तीर्थ पर हजारों लोग स्नान व तर्पण के लिए दूर दराज से आते हैं। शासन व प्रशासन की उपेक्षा देखकर ग्रामीणों ने स्वयं सरोवर की साफ सफाई का बीड़ा उठाया और श्राद्धों से पूर्व तीर्थ की बहुत हद तक सफाई भी की। अब तीर्थ में श्रद्धालु आसानी से स्नान कर पाएंगे।
श्री महर्षि फल्गु तीर्थ सेवा ट्रस्ट के प्रधान भीम शर्मा, उप प्रधान अशोक चौहान व ट्रस्टी सदस्यों ने बताया कि उनकी टीम ने शासन व प्रशासन की अनदेखी के चलते लगभग 15 दिन लगाकर तीर्थ की सफाई तो कर दी। अब श्रद्धालु स्नान तो आराम से कर सकेंगे, लेकिन तीर्थ तक पहुंचने वाली सबसे मुख्य व अहम सड़क की हालत खराब है। इस पर चलना किसी खतरे से कम नहीं है। जिला प्रशासन इसकी सुध लेने में आनाकानी कर रहा है। पिछले पांच वर्षों से स्थानीय लोग परेशानी झेल रहे हैं। इसकी मरम्मत कराई जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो।
महर्षि फल्गु के मंदिर के पुजारी दिनेश शर्मा ने कहा कि वायु पुराण के अनुसार फल्गु तीर्थ पर जाकर तर्पण व श्राद्ध करना चाहिए। वहां श्राद्ध करने से पित्तरों की मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी की प्रार्थना से भगवान विष्णु फल्गु रूप धारण किए। दक्षिणाग्रि में ब्रह्मा जी द्वारा हवन किए जाने पर फल्गु तीर्थ की उत्पत्ति हुई। अखिल ब्रहांड में जितने भी तीर्थ हैं, वे सब पितृ पक्ष में देवताओं के साथ फल्गु तीर्थ में नित्य स्नान करने आते हैं।
पूंडरी। पंडित रवि दत्त शास्त्री श्राद्ध पितृत्व के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक हैं। सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्य शुरू करने से पहले में मां-बाप तथा पितृगण को प्रणाम करना हमारा धर्म है। हमारे पुरखों की वंश परंपरा के कारण ही हम आज जीवित रहे हैं। सनातन धर्म के मतानुसार हमारे ऋषि मुनियों ने हिंदू वर्ष में संपादित 24 पक्षों में से एक पक्ष को पितृपक्ष अर्थात श्राद्धपक्ष का नाम दिया। पितृगण की आत्मा को मुक्ति तथा शांति प्रदान करने हेतु विशिष्ट कर्मकांड को ‘श्राद्ध’ कहते हैं।
पंडित के अनुसार
पूर्णिमा का श्राद्ध 29 सितंबर को होगा। 14 अक्तूबर दिन शनिवार को सर्व पितृ श्राद्ध संपन्न हो जाएंगे। चतुर्थी तिथि शय होने के कारण चतुर्थी का श्राद्ध दो अक्तूबर को होगा। वर्ष 2028 में श्राद्धों की सोमवती अमावस्या होगी, उसमें ही फल्गु का विशेष महत्व होगा। -आचार्य पंडित राम भगत हरित, राजौंद।