उचाना। महाराजा अग्रसेन मंदिर उचाना मंडी पुजारी अशोक शर्मा ने भजन-कीर्तन में कहा कि समाज और मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में एक व्यक्ति भगवान श्रीकृष्ण का परम भक्त था। वह प्रतिदिन नदी से जल लाकर मंदिर में भगवान का अभिषेक करता और सच्चे मन से पूजा करता था। उसके पास धन-संपत्ति नहीं थी, फिर भी वह कभी दुखी नहीं रहता था।
गांव के लोग उसकी गरीबी का मजाक उड़ाते और कहते, इतनी पूजा से क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि एक बार भयंकर अकाल पड़ा। खेत सूख गए, पशु मरने लगे और लोगों के घरों में अन्न समाप्त हो गया। सभी लोग परेशान होकर इधर-उधर सहायता खोजने लगे। उस व्यक्ति के पास भी भोजन नहीं बचा था लेकिन उसने अपनी पूजा और भगवान पर विश्वास नहीं छोड़ा।
उस रात उसे स्वप्न में श्रीकृष्ण ने दर्शन दिए और कहा, कल प्रात: नदी किनारे जाना, तुम्हारी सहायता होगी। अगले दिन वह व्यक्ति वहां पहुंचा तो उसे रेत में दबा एक घड़ा मिला जो सोने के सिक्कों से भरा था। उसने उस धन को केवल अपने लिए नहीं रखा बल्कि पूरे गांव में अन्न और पानी की व्यवस्था करवाई।
गांव वाले उसकी दया और भक्ति देखकर चकित रह गए। तब उसने कहा, सच्ची भक्ति वही है, जो केवल अपने सुख के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए हो।