जींद। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हुआ। कार्यक्रम में चार जिलों से आए करीब 30 सीआरपी किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों और उसके लाभों की जानकारी दी गई।
डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज समय की जरूरत बन चुकी है। यह खेती किसानों की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखती है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भोजन जहरीला होता जा रहा है जो गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है।
उन्होंने कहा कि सीआरपी किसान प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। किसान अपने खेतों में मॉडल तैयार कर अन्य किसानों को प्रेरित करें। सरकार भी इस कार्य के लिए सीआरपी किसानों को मानदेय प्रदान करेगी।
इस दौरान सूक्ष्म जीव वैज्ञानिक डॉ. बलजीत सहारण ने प्राकृतिक खेती में सूक्ष्म जीवों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीवामृत, घनजीवामृत और आच्छादन जैसी तकनीक मिट्टी में लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ाती हैं। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है और फसलों को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलता है।
प्राकृतिक खेती के मुख्य प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बहु-फसलीय खेती अपनाने की सलाह दी।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक खेती के मॉडल भी तैयार किए। कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को गुरुकुल कुरुक्षेत्र स्थित प्राकृतिक खेती फार्म का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक मॉडल देखे।