जींद। गांव बराड़ खेड़ा निवासी रामफल शर्मा ने 73 वर्ष की आयु में देहदान करके अन्य लोगों को भी प्रेरणा दी है। वह अब तक 15 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। 60 वर्ष के बाद चिकित्सकों ने उनको रक्तदान करने से मना कर दिया था। इसके बाद उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर सोमवार को देहदान कर दिया। विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा को सोमवार को उन्होंने अपने देहदान के कागजात सौंप दिए।
1950 में पंजाब राज्य के संगरूर जिले के गांव भागखेड़ा में रामफल शर्मा का जन्म हुआ। इनका पैतृक गांव बराड़ खेड़ा है। इनका पालन-पोषण बराड़ खेड़ा गांव में हुआ। 1968 में रामफल शर्मा की बिजली निगम में नौकरी लग गई। यहां पर वह कई यूनियनों में पदाधिकारी रहे। गांव बराड़ खेड़ा में सामाजिक कार्यों में इन्होंने विशेष रुचि दिखाई। फिलहाल वह जिला परिवेदना समिति के सदस्य हैं। रामफल शर्मा ने अब तक 15 बार रक्तदान किया है। 60 वर्ष की आयु में चिकित्सकों ने इनको रक्तदान करने से मना कर दिया था। इससे वह परेशान हो गए। उनकी पौत्री और गुरुकुल एंचरा कलां की शिक्षिका विसोका ने जब अपने दादा से परेशान होने पर कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि वह रक्तदान नहीं कर सकते। इस पर विसोका ने कहा कि वह देहदान तो कर सकते हैं। इसके बाद रामफल शर्मा ने देहदान करने का संकल्प लिया। उन्होंने जिला स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया तो विभाग ने देहदान की सभी औपचारिकता पूरी करवाईं। सोमवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर रामफल शर्मा ने विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा के आवास पर पहुंचकर उनको अपने देहदान से संबंधित कागजात सौंपे। विधायक ने 73 वर्षीय रामफल शर्मा के इस जज्बे को सलाम किया है।