अयोध्या में राममंदिर को लेकर चले आंदोलन को लेकर लोगों में जोश था। कारसेवा के लिए अयोध्या जाने के लिए छह-छह लोगों की टीम बनाई गई थी। अपनी टीम के साथ पहरेदारी तोड़कर अयोध्या पहुंच गए जहां गिरफ्तार कर लिए गए। 21 दिन तक जेल में रहे। ये बातें पूर्व चेयरमैन सज्जन सिंह ने कारसेवा की स्मृतियों को याद करते हुए कहीं।
उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के समय तो तीन ही व्यक्ति पहुंचे थे लेकिन 1990 में कारसेवा में जिले से 50 से 60 लोगों की भागीदारी रही थी। जिले में उनको टीम का प्रमुख बनाया गया था। एक टीम में छह लोगों को शामिल किया गया था। तय हुआ था कि अगर टीम का एक भी गिरफ्तार होता है तो टीम के सभी लोगों को गिरफ्तारी देनी है। इसी प्रकार वाहिनी में 100 लोगों का दल होता था।
सज्जन गर्ग ने बताया कि 1990 में कारसेवा के लिए अयोध्या में अपने गठ (टीम) के साथ जा रहे थे तो उनको पुलिस ने लखनऊ में गिरफ्तार कर उन्नाव जेल में 24 अक्तूबर को डाल दिया था। वह 14 नवंबर को छूटे थे। इस दौरान वह एक बार जेल प्रशासन को चकमा देकर भागने में कामयाब हुए। इसके लिए उन्होंने कैदियों से मिलने के लिए लगने वाली मोहर को अपनी बाजू पर लगवाया और जेल से फरार हो गए, लेकिन रास्ते में फिर पकड़े गए।
इस दौरान जो भी लोग कारसेवा के लिए अयोध्या की तरफ जाते थे उन्हें पुलिस पकड़ती थी। इसके चलते वह रास्ता बदल कर अयोध्या में घुसे। उन्होंने वह दस दिन कारसेवा की थी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर लोगों में जोश था। अलग अलग समय पर जाकर लोग कारसेवा करते थे।
सरकार ने चलवाई थी गोलियां, सरयू नदी में लाश बहाई
सज्जन गर्ग ने बताया कि उस समय उत्तर प्रदेश की मुलायम सिंह यादव की सरकार ने कार सेवा में शामिल होने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी लोगों में ज्यादा जोश था और देशभर से लोग कारसेवा में शामिल हो रहे थे। इनको रोकने के लिए मुलायम सरकार ने गोलियां चलवा दीं। इसमें कई लोगों की मौत हो गई। कई लोगों की लाशों को सरयू नदी में बहाया गया था। इसके कारण वहां पर रोष बढ़ गया था।