कोरोना वायरस के चलते ठप्प हुए काम धंधों को दोबारा शुरू करने के लिए प्रशासन ने योजना तैयार की है। इसके तहत रेहड़ी पटरी लगाने वालों को बिना गारंटी के दस हजार रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा। हालांकि यह योजना केंद्र सरकार द्वारा पीएम स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि योजना के नाम से लागू की गई है, लेकिन जिला स्तर पर अब ऐसे वेंडरों की पहचान की जाएगी। इसको लेकर एसडीएम सत्यवान मान ने सोमवार को अधिकारियों की मीटिंग ली।
उन्होंने कहा कि रेहड़ी-पटरी लगाने वालों के लिए शहरों में जगह निर्धारित की जाएंगी। तय की गई जगहों पर ही रेहड़ियां लगाई जा सकेंगी। इन जगहों की पहचान के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है, जो एक सप्ताह में जगह चिह्नित कर अपनी रिपोर्ट देगी। योजना के तहत मिलने वाले दस हजार रुपये के कर्ज को एक साल के अंदर किस्तों में चुकाना होगा। यदि ऋण की अदायगी एक वर्ष के अंदर या इससे पहले कर देता है तो उसे सात फीसदी का वार्षिक ब्याज सब्सिडी के तौर पर उनके बैंक खातों में डाली जाएगी।
जींद शहर में 17 जगहों की सूची
रेहड़ी वालों के लिए जगह तय करने के लिए एक कंपनी को हायर किया गया है। अब तक जींद शहर में 17 जगहों की एक सूची भी तैयार की गई है। अब कमेटी में शामिल होने वाले अधिकारी इन जगहों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि जो स्थान रेहड़ी वालों को दिया जाना है, वह किस विभाग की जमीन है।
ये साइटें की गई हैं तय
फिलहाल प्रशासन के पास जो रिपोर्ट पहुंची है उसमें हुडा पार्क एक, दो व तीन, अनाज मंडी की दो साइट, नंदीशाला, जींद-गोहाना रोड, काठ मंडी की दो साइट, हांसी रोड आरओबी के नीचे, सैनी रामलीला मैदान, नया बस स्टैंड शामिल हैं।