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अभिभावकों ने निजी स्कूल पर लगाया बच्चों का गलत मूल्यांकन करने का आरोप

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जानकारी देते अभिभावक सुभाष। संवाद - फोटो : Jind
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एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन व शिक्षकों पर 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की आंतरिक परीक्षा की असेसमेंट गलत बनाने का आरोप लगाकर रोष जताया। उनका आरोप है कि स्कूल की लापरवाही का खामियाजा 35 विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। विद्यार्थियों का एक साल खराब हो गया है।
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खराब परीक्षा परिणाम आने पर बुधवार को अभिभावक स्कूल प्रबंधन के पास पहुंचे तो उन्होंने उनके साथ बैठक कर बच्चों की फीस वापस करने की बात कहकर मामला शांत करवाया। इससे अभिभावक व बच्चे काफी परेशान हैं। स्कूल प्रबंधन बच्चों की फीस तो जरूर वापस कर देंगे, लेकिन उनका एक साल खराब हो गया है।
गौरतलब है कि 30 जुलाई को सीबीएसई द्वारा 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित किया गया था। कोरोना संक्रमण के कारण परिणाम यूनिट टेस्ट व 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम के आधार पर बनाया गया है। जब निजी स्कूल के विद्यार्थियों ने अपना परिणाम देखा तो उनमें से 35 विद्यार्थियों का खराब दिखाया गया था। इसमें से 13 बच्चों की री अपीयर आई है तो पांच फेल हो गए हैं। वहीं 17 बच्चों के 50 से 55 प्रतिशत के बीच नंबर आए हैं। 31 जुलाई को जब अभिभावक रोष स्वरूप स्कूल प्रशासन के पास पहुंचे तो प्रबंधन ने समस्या का समाधान करने के लिए मंगलवार तक का समय मांगा था। जब बुधवार को अभिभावक स्कूल पहुंचे तो स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की फीस लौटाने की बात कहकर मामला शांत करवा दिया।
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अभिभावक सुभाष के अनुसार जिन विद्यार्थियों की री अपीयर आई या फेल हुए हैं, उनकी फीस वापस की जाएगी। वहीं जिन बच्चों के कम अंक आए हैं उनकी अच्छी तैयारी करवा दोबारा से परीक्षा दिलवाई जाएगी। जिसका कोई चार्ज अभिभावकों से नहीं लिया जाएगा। अगर बच्चे फिर भी परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं हुए तो उनको दोबारा से 12वीं कक्षा के नए सत्र में बैठाया जाएगा, जिसका स्कूल कोई चार्ज नहीं लेगा।
17 बच्चों को नहीं मिल पाएगा अच्छे कॉलेजों में दाखिला
निजी स्कूल के जिन 35 बच्चों का 12वीं कक्षा का परिणाम खराब आया है, उसमें से 17 को 50 से 55 प्रतिशत के बीच अंक मिले हैं। सीबीएसई द्वारा 12वीं कक्षा का परिणाम यूनिट टेस्ट व 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम के आधार पर निकाला गया है। जिन 17 विद्यार्थियों के 50 से 55 प्रतिशत अंक हैं वे दसवीं कक्षा में मेरिट आए थे। वहीं उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा 12 अगस्त से कॉलेजों में दाखिला के लिए संभावित शेड्यूल जारी किया गया है। ऐसे में जिन बच्चों के अंक 50 से 55 प्रतिशत के बीच हैं उनको अच्छे कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल पाएगा। क्योंकि इस बार कॉलेजों में मेरिट ज्यादा हाई जाने की संभावना है।
इस मामले की जांच करवाई जाएगी। इसके लिए मुख्यालय को लिखा जाएगा। वहां से जो भी निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार विद्यार्थियों की समस्या का समाधान किया जाएगा। -अंजू सिहाग, निदेशक, आधारशिला पब्लिक स्कूल।
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