25जेएनडी01-गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब में लंगर छकती साध संगत। स्रोत संगत
जींद। गुरु तेग बहादुर साहिब का शहीदी दिवस मंगलवार को गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब में श्रद्धा से मनाया गया। सबसे पहले रखे गए चौदह सहज पाठ सहित श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ का भोग डाला गया। उसके बाद धार्मिक दीवान सजाया गया।
इसमें हजूरी रागी भाई जसबीर सिंह रमदसिया के रागी जत्थे द्वारा निरोल गुरबाणी शब्द कीर्तन का गायन किया गया। गुरुघर प्रवक्ता बलविंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 1675 में औरंगजेब के दरबार में उनपर धर्म बदलने का दबाव बनाया लेकिन उन्होंने सिद्धांतों से पीछे हटने के बजाय पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि धर्म छोड़ना नहीं, धर्म की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।
इसके बाद साजिश रची गई और उन्हें कैद किया गया। बाद में 24 नवंबर को उन्हें शहीद कर दिया गया। उन्होंने धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। उनके इस बलिदान के कारण उन्हें हिंद की चादर भी कहा जाता है।
बलविंदर सिंह ने कहा कि हमें गुरु तेग बहादुर की महान शिक्षाओं को सदैव याद रखना चाहिए। हमें सुख, दुख, सम्मान और अपमान में स्थिर और संतुलित जीवन व्यतीत करना चाहिए।
भाई सतवंत सिंह और भाई रिषिपाल सिंह के रागी जत्थे द्वारा शब्द कीर्तन गायन किया गया। भाई सतवीर सिंह ने अपने कथा प्रवचनों में गुरु तेग बहादुर साहिब की शहीदी का इतिहास सुनाया। नहिं निंदिआ नहिं उसतति, जाकै लोभ मोह अभिमाना। हरख सोग ते रहै निआरऊ नाहि मान अपमाना।
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25जेएनडी01-गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब में लंगर छकती साध संगत। स्रोत संगत