फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी कर हाइवा डंपर किसी अन्य व्यक्ति के नाम करने के आरोप में जींद आरटीए कार्यालय के लिपिक सोमदत्त समेत नौ लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में शहर की विश्वकर्मा कॉलोनी निवासी जोगिंद्र ने बताया कि उसने 17 जून 2008 को एक हाइवा डंपर खरीदा था। जिसका पंजीकरण 25 जून 2008 को आरटीए कार्यालय जींद में हुआ था। उसने वह डंपर उत्तराखंड के रुद्रपुर निवासी हरविंद्र सिंह को मासिक किराये पर दिया था। जिसका मासिक किराया वह हर महीने बैंक खाते में डलवाता थ। हरविंद्र ने जुलाई 2008 से 31 मार्च 2014 तक उसने नियमित रूप से किराया दिया। मार्च 2014 के बाद उसने किराया डलवाना बंद कर दिया। इसको लेकर जब हरविंद्र से बात की तो वह किराये को लेकर झूठे आश्वासन देने लगा। जब उसने किराये को लेकर दबाव बनाया तो उसने कहा की यह गाड़ी उसकी खुद की है। इसको लेकर जब आरटीए कार्यालय जींद से जानकारी मांगी तो उन्होंने जानकारी देने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी तो गाड़ी के रिकॉर्ड के बारे में कुछ जानकारी होने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग चंडीगढ़ के पास अपील भेजकर सूचना प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने आरटीओ रुद्रपुर से इसकी जानकारी आरटीआई के माध्यम से मांगी तो उस जानकारी में आरसी के प्रथम पेज पर पंजीकरण की तारीख पर कटिंग कर रखी थी। इसमें हरविंद्र और आरटीओ कार्यालय जींद ने मिलकर साजिश को अंजाम दिया। उनके फर्जी हस्ताक्षर कर गाड़ी की एनओसी भी हरविंद्र के नाम कर दी गई। इसके बाद आरटीओ रुद्रपुर कार्यालय के कर्मचारियों ने आरसी के प्रथम पेज पर कटिंग करके पंजीकरण तारीख 25 जून 2008 की जगह चार जून 2008 करके गाड़ी को हरविंद्र के नाम स्थानांतरण कर दिया। इस प्रकार जबकि गाड़ी के खरीद के सभी दस्तावेज उसके पास है। गाड़ी का टोकन टैक्स एक अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2013 तक फर्जी इंट्री कर रखी है जिसका विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसमें फर्जी तरीके से स्टांप वेंडर से मिलीभगत से लिया और आरटीओ कार्यालय जींद में दिया। जिसके आधार पर एनओसी ली गई है। स्टांप पर वेंडर की मोहर भी नहीं है। इसमें जब उन्होंने एनओसी जारी करने वाले कर्मचारियों की सूची मांगी तो लिपिक कुलवंत ने 26 जून 2019 को लिखित जवाब दिया कि हमारे कार्यालय के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस मामले में सिविल लाइन थाना प्रभारी हरिओम ने बताया कि रुद्रपुर निवासी हरविंद्र सिंह, सोमदत्त वाहन पंजीकरण लिपिक आरटीए कार्यालय जींद, विकाश लिपिक एनओसी जारीकर्ता, निर्मला देवी लिपिक टोकन टैक्स जमाकर्ता आरटीए कार्यालय जींद, सुरेश कुमार चहल आरटीए जींद, रमेश सन्नवाल वाहन हस्तांतरण का कार्य रुद्रपुर उत्तराखंड, नंदकिशोर व द्वारिका प्रसाद सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रुद्रपुर उत्तराखंड के खिलाफ धोखाधड़ी कर गाड़ी दूसरे के नाम करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।