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Jind: स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर गए, फाइनेंस विभाग के सेवा नियम समाप्त करने के पत्र पर रोष

Mon, 27 Jun 2022 12:38 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)

सार

पांच दिन पहले फाइनेंस विभाग के सचिव की तरफ से कर्मचारियों के सेवा नियम समाप्त कर फिक्स सैलरी करने का पत्र मिशन निदेशक को भेजा है, जिससे कर्मचारियों को रोष है।
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जींद में हड़ताल पर बैठीं एनएचएम कर्मी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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जींद में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम कर्मचारी सोमवार को अपनी मांगों को लेकर सामान्य अस्पताल में हड़ताल पर चले गए। एनएचएम कर्मियों की मांग है कि फाइनेंस विभाग द्वारा जारी सेवा नियम समाप्त करने के पत्र को वापस लिया जाए। सातवें वेतनमान का लाभ तुरंत प्रभाव से कर्मियों को दिया जाए। सेवा नियम में संशोधन किया जाए। हालांकि कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं हुई। 

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एनएचएम कर्मचारी नेता संदीप कुंडू, गौरव सहगल, सुनील रेढू ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी पिछले काफी समय से अपनी मांगों को लेकर रोष जता रहे हैं। मांगों को लेकर कई बार सरकार और अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है लेकिन उनकी मांगों की तरफ कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। अब कर्मचारियों को मिल रहे लाभ को भी छीनने का प्रयास किया जा रहा है। 

पांच दिन पहले फाइनेंस विभाग के सचिव की तरफ से कर्मचारियों के सेवा नियम समाप्त कर फिक्स सैलरी करने का पत्र मिशन निदेशक को भेजा है, जिससे कर्मचारियों को रोष है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 2018 में एनएचएम कर्मचारियों को सर्व शिक्षा अभियान के कर्मचारियों के भांति और उसी के आधार पर सेवा नियम का लाभ दिया था लेकिन सर्व शिक्षा अभियान के कर्मचारियों को सरकार की और से सातवें वेतन का लाभ भी दे दिया है और एनएचएम कर्मचारियों को आज तक इस लाभ से वंचित रखा है। ऐसे में कर्मियों को मजबूरन हड़ताल करनी पड़ रही है। 
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उन्होंने बताया कि एनएचएम कर्मचारी विभागीय कार्य के अलावा एंबुलेंस सेवा, जच्चा-बच्चा टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, महिलाओं की प्रसूति सेवा, स्कूल हेल्थ, तपेदिक स्वास्थ्य सेवाएं, कोविड टीकाकरण और सैंपलिंग आदि का कार्य करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गेस्ट अध्यापकों की तर्ज पर सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए। तमिलनाडु व मणिपुर की तर्ज पर रेगुलर पॉलिसी बनाई जाए। आकस्मिक मृत्यु पर 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता व आश्रित को नौकरी दी जाए।

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