जींद। जिले के सभी 423 प्राथमिक विद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस शनिवार को मनाया गया। इस दौरान विद्यालयों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य भाषाई विविधता और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और बच्चों को मातृभाषा सीखने के लिए प्रेरित करना था।
मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने से बच्चों के शैक्षिक परिणामों में गुणात्मक सुधार होता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में भाषा के प्रति सम्मान, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सभी विद्यालयों में सुबह की प्रार्थना सभा से हुई जहां शिक्षकों ने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के महत्व के बारे में बताया गया।
इसके बाद बाल वाटिका से लेकर कक्षा तीसरी तक के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न रोचक और शिक्षाप्रद गतिविधियां आयोजित की गईं। बाल वाटिका से कक्षा दूसरी तक के बच्चों ने मातृभाषा में परिचय दिया, चित्रों का वर्णन किया और लोकगीत व कविताएं प्रस्तुत कीं। कई बच्चों ने घर पर सुनी दादी-नानी की कहानियां और लोक कथाएं अपनी भाषा में सुनाई जिससे उनके बोलने, सोचने और अभिव्यक्ति के कौशल का विकास हुआ।
कक्षा तीसरी के विद्यार्थियों ने अभिनय के माध्यम से दैनिक जीवन की परिस्थितियों जैसे घर, स्कूल और बाजार के दृश्यों पर अपनी मातृभाषा में संवाद प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने न केवल बच्चों की भाषा दक्षता को निखारा बल्कि उनमें आत्मविश्वास और रचनात्मकता का भी संचार किया। इस बार कार्यक्रम को सामुदायिक उत्सव का रूप देने के लिए स्कूल प्रबंधन समितियों, अभिभावकों और दादा-दादी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
अभिभावकों और समाज के बुजुर्गों ने बच्चों को मातृभाषा में कहानियां सुनाईं जिससे विद्यालयों में पारिवारिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का वातावरण बना। सभी विद्यालय मुखियाओं और शिक्षकों को पहले से ही निर्देश दिए गए थे कि वे स्कूल प्रबंधन समितियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करें और इसे सफलतापूर्वक संपन्न करें। प्रत्येक कक्षा के शिक्षकों ने विभागीय निर्देशानुसार कम से कम दो गतिविधियां आयोजित कीं जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि हर बच्चे को भागीदारी का अवसर मिले।
इस दौरान रंगोली, पोस्टर मेकिंग, लोक गीत प्रतियोगिता और मातृभाषा पर आधारित निबंध लेखन जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। बच्चों ने अपनी भाषाओं में अपनी बोली, अपनी पहचान विषय पर विचार व्यक्त किए।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर जिले के स्कूलों में यह पहल न केवल भाषाई गौरव को पुनर्जीवित करेगी बल्कि विद्यार्थियों में सांस्कृतिक जुड़ाव, आत्मसम्मान और अभिव्यक्ति की शक्ति को भी सशक्त बनाएगी।-राजेश वशिष्ठ, जिला समन्वयक, एफएलएन