डीआरडीए के बाहर बैठकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते मजदूर। संवाद
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मनरेगा मजदूर यूनियन ने वीरवार को जिला मनरेगा अधिकारी कार्यालय के बाहर जिला प्रधान सुरेश कुमार की अध्यक्षता में धरना दिया। प्रदेश सरकार के खिलाफ मांगों को लेकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन करने के साथ 200 दिन प्रतिवर्ष काम की गारंटी दी जाए।
राज्य महासचिव सोमनाथ ने कहा कि आज पूरे देश में मजदूरों की हालत बदतर हो चुकी है। लेकिन सरकार विदेशी पूंजीपतियों के हाथों उनके मुनाफे की व्यवस्था करने की सोच रही है। मजदूरों को दी जाने वाले सब्सिडी खत्म की जा रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरी में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर मजदूरों को काम से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर मनरेगा मजदूरों की समस्याओं का जल्द ही समाधान नहीं किया गया तो वे सभी खंडों पर धरना देने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि 23 सितंबर 2020 को मोदी सरकार ने 44 श्रम कानूनों को खत्म करके 4 मजदूर विरोधी लेबर कोड बनाए थे। मनरेगा मजदूर यूनियन अन्य मजदूर संगठनों के साथ मिलकर मजदूर विरोधी लेबर कोड तथा मनरेगा मजदूरों के अधिकारों के हनन के विरोध में 23 सितंबर को काला दिवस के रूप में मनाएंगे।