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मनरेगा मजदूरों को 23 दिन से नहीं मिला काम, बीडीपीओ कार्यालय पर की नारेबाजी

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काम दिलाने की मांग को लेकर बीडीपीओ कार्यालय पहुंचे मनरेगा मजदूर। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। अहिरका गांव के मनरेगा मजदूर 23 दिनों से काम नहीं मिलने के विरोध में वीरवार को बीडीपीओ कार्यालय पर पहुंचे। उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए बेरोजगारी भत्ता देने और काम दिलाने की मांग की। यदि उनको जल्द काम नहीं मिला तो वह सरकार और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन शुरू कर देंगे।
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अहिरका गांव निवासी भागचंद, पवन कुमार, गीता देवी, मीना देवी, रोशनी, कविता ने बताया कि छह सितंबर को उन्होंने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को शिकायत देकर उनको मनरेगा योजना के तहत काम दिलवाने की मांग की थी, लेकिन अभी तक उनको काम नहीं मिला जबकि मनरेगा कानून में प्रावधान है कि यदि काम मांगने के 15 दिन के अंदर काम नहीं मिलता है तो मांगने वाले मजदूरों को उस समयावधि का बेरोजगारी भत्ता दिया जाए तथा आगे का काम दिया जाए।
रमेशचंद्र ने बताया कि कोरोना आपदा के कारण लोगों के काम धंधे छूट गए है, जिससे जनता भूखमरी की कगार पर पहुंच गई और आज जनता के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। मनरेगा मजदूर और मेट काम के लिए बीडीपीओ के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन मजदूरों को मांगने पर काम नही दिया जा रहा है। केंद्र सरकार इसको खत्म करना चाहती जिसका उदाहरण सरकार ने मनरेा के बजट में 25000 करोड़ की कटौती करके केंद्रीय बजट में मजदूर और गरीब आबादी के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी, कोरोना आदि के चलते संगठित, असंगठित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार खत्म हो गए हैं। निर्माण क्षेत्र में पिछले सात साल में नौकरी आधी रह गई। 2017-20 के बीच मेन्यूफेक्चरिंग सेक्टर में 2.3 करोड़ नौकरियां खत्म हो चुकी थी। देश में 2021 में शहरों में बेरोजगारी की दर अपने रिकॉर्ड स्तर पर यानी 9.3 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। लोगों की आमदन में भारी कमी आई है। ऐसे हालात में जनता को राहत प्रदान करने की बजाय केंद्रीय बजट में प्रतिगामी कदम उठाए गए हैं।
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